नई दिल्ली, नवंबर 24। सरकार ने तय किया है कि वह क्रिप्टोकरेंसी पर विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करेगी। इसका नाम 'द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021' है। इस बिल में देश में सभी प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने की बात की है। अगर यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है तो बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना संभव नहीं रह जाएगा। हालांकि इस बिल में यह भी कहा गया है कि कुछ अंतर्निहित तकनीक और इसके उपयोगों को बढ़ावा देने के लिए कुछ अपवादों में इसकी अनुमति दी जा सकती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार संसद में यह बिल लेकर आ रही है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो आरबीआई की डिलिटल करेंसी आने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।

आरबीआई लाएगा अपनी डिजिटल करेंसी
वहीं एक सरकारी दस्तावेज के अनुसार 'द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021' में आरबीआई की तरफ से जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल करेंसी को जारी करने के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने की भी बात की गई है।
संसदीय समिति की बैठक में हो चुकी है चर्चा
वहीं पहले भाजपा नेता जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने विभिन्न हितधारकों के साथ क्रिप्टो फाइनेंस और क्रिप्टोकरेंसी के गुण-दोष पर एक चर्चा की थी। इसमें कई सदस्यों ने क्रिप्टो करेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाए इसके बाजार को रेगुलेट करने के पक्ष में राय दी थी। समिति की बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी क्रिप्टो करेंसी के मुद्दे पर विभिन्न मंत्रालयों और रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक चर्चा की थी।
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर रेग्युलेटर जता चुका हैं चिंता
आरबीआई कई बार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चिंता जता चुका है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले हफ्ते कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े गहरे मुद्दों पर गहन विमर्श की जरूरत है। वहीं सेबी ने भी रिटेल निवेशकों को ध्यान में रखते हुए भारत में अनियमित क्रिप्टोकरेंसी बाजार के तेज ग्रोथ को लेकर चिंताएं जताई थीं।
क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग
क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग या बिटकॉइन माइनिंग का मतलब पजल्स को सॉल्व करके नई बिटकॉइन बनाना है। साथ ही क्रिप्टो माइनर्स को ब्लॉकचेन नेटवर्क पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन को वेलिडेट करना और इन्हें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में शामिल करना शामिल है।
ये है क्रिप्टो को लेकर बड़ी चुनौती
डिजिटल करेंसी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आसानी से मैनिपुलेट किया जा सकता है। यही वजह है कि बिटकॉइन के डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर में केवल मान्यता प्राप्त माइनर्स को ही डिजिटल लेजर में ट्रांजैक्शंस अपडेट करने की अनुमति है।
चाहिए होती है एडवांस मशीनें
क्रिप्टो माइनिंग एक तरह से बहुमूल्य धातुओं की माइनिंग की तरह होता है। जैसे सोना, चांदी या हीरे को माइन किया जाता है, ठीक उसी तरह क्रिप्टो माइनर्स सर्कुलेशन में नए कॉइन रिलीज करते हैं। इसके लिए ऐसी मशीनों को काम पर लगाया जाता है जो गणित के जटिल समीकरणों को सुलझाते हैं।
कौन कौन कर सकता है क्रिप्टो माइनिंग
क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग के लिए ऐसे कम्प्यूटर चाहिए जिनमें जटिल क्रिप्टोग्राफिक मैथमेटिक इक्वेशंस को सॉल्व करने के लिए स्पेशल सॉफ्टवेयर हो। बिटकॉइन के शुरुआती दिनों में इसे होम कम्प्यूटर से एक सिंपल सीपीयू चिप से माइन किया जा सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। आज इसके लिए स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है।
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