नई दिल्ली, अगस्त 5। सरकार ने गुरुवार को विवादास्पद रेट्रोस्केपक्टिव टैक्स डिमांड (पूर्वव्यापी कर मांग) को समाप्त करने के लिए आयकर अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा। यह कदम पिछले साल केयर्न एनर्जी और वोडाफोन समूह के साथ टैक्स विवाद के बाद उठाया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया, जो 28 मई 2012 से पहले भारतीय संपत्ति के इंडायरेक्ट ट्रांसफर पर की गई विवादास्पद टैक्स डिमांड को वापस लेने का प्रयास करता है। सरकार का यह कदम वोडाफोन और केयर्न के लिए राहत भरा है।
खत्म होगी पुरानी टैक्स डिमांड
सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में केयर्न एनर्जी और वोडाफोन जैसी कंपनियों के ऊपर से सभी टैक्स डिमांड हटाने के लिए ये विधेयक पेश किया है और कहा है कि सरकार इस तरह के नियमों को लागू करने के लिए इकट्ठे किए गए पैसे को वापस कर देगी। इस बिल का सीधा असर ब्रिटिश फर्मों केयर्न एनर्जी पीएलसी और वोडाफोन ग्रुप के साथ लंबे समय से चल रहे टैक्स विवाद पर पड़ेगा।
भारत सरकार को लगा झटका
पूर्वव्यापी कर लगाने के लिए भारत सरकार को इन दोनों कंपनियों के लिए दो अलग-अलग मध्यस्थता मामलों में हार झेलनी पड़ी। दोनों ही मामलों में भारत को "कथित कर देयता या कोई ब्याज और या दंड" की वसूली के लिए प्रयास नहीं करने को कहा गया। वोडाफोन मामले में सरकार की कोई देनदारी नहीं है, मगर केयर्न एनर्जी को 1.2 अरब डॉलर वापस करने होंगे। ये रकम कंपनी के शेयरों को बेचने, टैक्स रिफंड रोकने और डिविडेंड जब्त करने से जुड़ी हुई है।
वोडाफोन के साथ क्या है मामला
सरकार ने 2007 में हचिसन व्हामपोआ से 11 अरब डॉलर की भारतीय मोबाइल संपत्ति के अधिग्रहण मामले में वोडाफोन से 11,000 करोड़ रु की टैक्स डिमांड की थी। पिछले साल सितंबर में, भारत वोडाफोन के खिलाफ मामला हार गया था। सरकार की तरफ से दिसंबर में अपील दायर की गयी थी। ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया था कि वोडाफोन पर टैक्स लायबिलिटी के साथ ब्याज और जुर्माना लगाने से भारत और नीदरलैंड के बीच एक निवेश संधि समझौते का उल्लंघन हुआ है।
कोर्ट ने सुनाया था वोडाफोन के पक्ष में फैसला
2012 में, सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन के पक्ष में फैसला सुनाया लेकिन बाद में सरकार ने नियमों को बदल दिया ताकि कंपनी को ऐसी टैक्स डील में लाया जा सके, जो पहले ही हो चुकी थी।
केयर्न के साथ क्या है मामला
करीब 2 साल पहले कोनोकोफिलिप्स ने 200 करोड़ डॉलर के कंपनसेशन के लिए वेनेजुएला की ऑयल कंपनी पीडीवीएसए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अमेरिकी अदालत में केस दर्ज कराया था। बाद में पीडीवीएसए ने कोनोकोफिलिप्स को पेमेंट कर दी। फिर 3 मेम्बरों के एक ट्रिब्यूनल ने (जिसमें एक जज की नियुक्ति भारत सरकार ने की थी) ने 2006-07 में केयर्न एनर्जी से इसके भारतीय व्यापार के लिए सरकार द्वारा 10,247 करोड़ रु की टैक्स डिमांड को गलत बताया। तब भारत सरकार को बेचे गए शेयरों की वैल्यू और प्राप्त किया गया लाभांश लौटाने को भी कहा गया था। साथ ही वो टैक्स रिफंड्स लौटाने को भी कहा गया जो टैक्स एनफोर्स करने के लिए रोके गए।
More From GoodReturns

इंडिपेंडेंस डे स्पेशल FD: आज रात खत्म हो रहा है निवेश का मौका, पैसा लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

नया मल्टी-एसेट NFO: SIP या एकमुश्त, निवेश से पहले ये 5 बातें जरूर जानें

Sugar Stocks: चीनी की कीमतों में आग, इन 7 शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग की दमदार रणनीति

EMI और क्रेडिट कार्ड बिल: सोमवार को बैंक अकाउंट में रखें बैलेंस, वरना कटेगा भारी जुर्माना

Tempsens Instruments IPO: आज से खुला निवेश का मौका, जानें प्राइस बैंड और लॉट साइज की पूरी डिटेल

Airtel का बड़ा झटका: अचानक बंद हुए कई लोकप्रिय प्रीपेड प्लान, रिचार्ज से पहले जानें ये जरूरी बात

जियो नेटफ्लिक्स बिलिंग में अचानक बदलाव! कहीं आपका प्लान तो नहीं हुआ डाउनग्रेड? चेक करें तुरंत

₹399 से कम में अनलिमिटेड 5G और OTT का तड़का, Jio, Airtel और Vi के बेस्ट प्लान्स की पूरी सच्चाई

भारत बनाम श्रीलंका मैच: लाइव स्ट्रीमिंग में बफरिंग? ₹22 से शुरू हैं ये बेस्ट डेटा प्लान्स

Kotak Diversified Equity All Cap NFO: आज बंद हो रहा है निवेश का मौका, क्या आपको दांव लगाना चाहिए?

PMFBY खरीफ 2026: आज है रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन, बैंक बंद होने पर भी ऐसे करें आवेदन



Click it and Unblock the Notifications