देश की टैक्स व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के 12% टैक्स स्लैब को हटाने की तैयारी में है। टीवी9 की रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और अब इसे जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में रखा जाएगा। अगर इस पर मुहर लगती है, तो यह जीएसटी लागू होने के बाद का सबसे बड़ा सुधार माना जाएगा।

कैसे बदलेगा टैक्स ढांचा?
फिलहाल देश में पांच मुख्य टैक्स स्लैब हैं 0%, 5%, 12%, 18% और 28%। इसके अलावा कुछ खास चीजों जैसे सोना और चांदी पर 0.25% और 3% की दर से टैक्स लगता है। अब सरकार चाहती है कि 12% स्लैब को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए और इसमें आने वाले सामानों को या तो 5% या 18% स्लैब में डाल दिया जाए। इससे टैक्स सिस्टम को सरल और स्पष्ट बनाने में मदद मिलेगी।
राज्यों से बातचीत शुरू
वित्त मंत्रालय इस बदलाव को लागू करने से पहले राज्यों से बातचीत कर रहा है, क्योंकि जीएसटी एक साझा कर व्यवस्था है और इसमें कोई भी बदलाव सभी राज्यों की सहमति से ही किया जा सकता है। अगर सभी राज्य इस प्रस्ताव पर सहमत हो जाते हैं तो जल्द ही नई टैक्स दरों को लागू किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि 12% स्लैब हटाने से टैक्स स्ट्रक्चर ज्यादा साफ और आसान होगा। इससे व्यापारियों को टैक्स भरने में सहूलियत होगी और आम लोगों को भी कुछ चीजों पर राहत मिल सकती है। फिलहाल जीएसटी में 12% स्लैब में करीब 19% वस्तुएं आती हैं, जो या तो सस्ती हो सकती हैं अगर उन्हें 5% में रखा गया, या महंगी हो सकती हैं अगर उन्हें 18% में डाला गया।
उद्योग जगत की थी पुरानी मांग
पिछले कुछ वर्षों से कारोबारी संगठन लगातार यह मांग कर रहे थे कि जीएसटी को आसान और स्पष्ट बनाया जाए। उनका कहना था कि वर्तमान टैक्स स्लैब कठिन हैं और इससे व्यापार करना मुश्किल होता है। अब सरकार उनकी इस मांग पर अमल करती दिख रही है।
आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा। टैक्स ढांचा अब स्थिर हो चुका है और इसे और आसान बनाकर निवेश और व्यापार को बढ़ाया जा सकता है। साथ ही सरकार कई देशों के साथ व्यापार समझौते पर काम कर रही है, जहां सरल टैक्स सिस्टम घरेलू उद्योगों को फायदा देगा।
नई दरें कब लागू होंगी?
अगर जीएसटी काउंसिल इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो नई दरें जल्दी ही लागू की जा सकती हैं। इसके लिए तकनीकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और राज्यों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा इनकम टैक्स सिस्टम में भी कुछ बदलाव प्रस्तावित हैं, जिसका कानून मानसून सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है।
जीएसटी के 12% स्लैब को हटाने का फैसला टैक्स सिस्टम को सरल और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। इससे जहां व्यापार जगत को राहत मिलेगी, वहीं आम जनता को भी इसका असर कीमतों में देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजरें अगस्त में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं।
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