E-Commerce Export: इस समय भारत में ई-कॉमर्स का बोलबाला है। इनसे हर साल करोड़ों का बिजनेस होता है। लेकिन अब ई-कॉमर्स के जरिए एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी जोरों पर है। इससे अभी घरेलू स्तर पर अपने सामान को बेचने वाले छोटे-छोटे उद्यमी विदेश में भी अपने प्रोडक्ट्स को आसानी से निर्यात कर पाएंगे। इससे जाहिर तौर पर उनकी आमदनी में इजाफा होगा।
आपको बताते चलें कि विदेश व्यापार महानिदेशक संतोष कुमार सारंगी के अनुसार आने वाले 6 से 7 साल के अंदर भारत का ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट 200 अरब डालर तक पहुंचाने की संभावना है। फिलहाल भारत सिर्फ 1.2 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट करता है, जिसे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सारंगी ने कहा कि ई-कॉमर्स को आगे बढ़ाने में लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स सर्विस प्लेटफार्म मुहैया कराने वाले, अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली और इसे रेगुलेट करने वाला आरबीआई, टैक्स डिपार्टमेंट और डीजीएफटी जैसी एजेंटीयों की भूमिका काफी अहम होती है।
गौरतलब है कि ई-कॉमर्स निर्यात को 200 अरब डालर तक ले जाने के लिए कई बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव की जरूरत पड़ेगी। इसके साथ ही एक बेहतर स्ट्रेटजी, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को लेकर रेगुलेटर एजेंसियों की सोच में बदलाव करना भी काफी जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार छोटे-छोटे एंटरप्रेन्योर्स को ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट से जोड़ना चाहती है। इसी वजह से डाकघर में ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट के लिए पार्सल खिड़की अलग से बनाई गई है और साथ ही डाकघर में ही उन्हें कस्टम क्लीयरेंस भी मिल जाता है। आपको बताते चलें कि देश के प्रमुख जिलों में ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट केंद्र खोले जाएंगे। जहां से आसपास के जिलों के उद्यमी अपने सामान को आसानी से एक्सपोर्ट कर पाएंगे। विदेश व्यापार नीति में इसकी घोषणा पहले ही कर दी गई थी और अब इस पर काम भी चल रहा है।
आपको बताते चले कि ई-कॉमर्स इंपोर्ट में जबरदस्त संभावना है, लेकिन इसके लिए प्रोडक्ट में विविधता और इनोवेशन की जरूरत भी पड़ेगी। इसके साथ ही एंटरप्रेन्योर्स में एक्सपोर्ट मार्केट को पहचानने की क्षमता को और बेहतर बनाने की जरूरत है। गौरतलब है कि अभी रेगुलेटर एजेंसीज बिजनेस टू बिजनेस लेवल पर ही ई-कॉमर्स निर्यात के बारे में विचार करती हैं, अगर ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को 200 अरब डालर तक ले जाना है, तो इस सोच में बदलाव करना भी काफी जरूरी है।
गौरतलब है कि ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ाने में भुगतान प्रणाली सबसे अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में पैसों के ट्रांजैक्शन के लिए फिनटेक की बड़ी भूमिका हो सकती है। फिनटेक ई-कॉमर्स निर्यातकों को भुगतान प्रणाली में मदद कर सकते हैं। सारंगी के अनुसार अगर भारत को फ्यूचर में अपने सर्विस और प्रोडक्ट एक्सपोर्ट को 2 लाख करोड़ डॉलर के पार ले जाना है, तो इसे हासिल करने में फिनटेक की अहम भूमिका हो सकती है।
ई-कॉमर्स के जरिए अगर एक्सपोर्ट बढ़ता है तो इससे भारत की इकोनॉमी में जबरदस्त पैसे का इनफ्लो होगा। इससे छोटी-छोटी उद्यमियों को जबर्दस्त फायदा मिलेगा। ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट के जरिए बढ़िया क्वालिटी के प्रोडक्ट्स की मांग भी बढ़ेगी और इससे कई लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। भारत अगर अपने ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को 2 लाख करोड़ तक पहुंचाता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त रफ्तार मिलेगी।
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