नई दिल्ली, अप्रैल 24। एक तरफ रूस और यूक्रेन विवाद और दूसरी तरफ काबू से बाहर होती महंगाई। इन दोनों कारणों ने सरकार को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आईपीओ के आकार को घटाने का मजबूर कर दिया है। जानकारी के अनुसार एलआईसी के आईपीओ का आकार काफी घटाया जा रहा है। इससे जहां आईपीओ के माध्यम से कम जुटाना होगा, जो सरकार के लिए आसान रहेगा, वहीं निवेशकों के लिए मौके में कमी भी आएगी।
आइये जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है।
अब साढ़े तीन फीसदी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश
शेयर बाजार के हालातों को देखते हुए सरकार एलआईसी के आईपीओ का आकार घटा कर अब साढ़े तीन फीसदी तक सीमित करने जा रही है। पहले करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की बात हो रही थी। सरकार को उम्मीद है कि साढ़े तीन फीसदी हिस्सेदारी बेचकर सरकार को करीब 21,000 करोड़ रुपये पाने में मदद मिल जाएगी।
जानिए ऐसे में क्या होगा एलआईसी का वैल्यूएशन
अगर सरकार एलआईसी की हिस्सेदारी 3.5 फीसदी बेचती है और उसे 21,000 करोड़ रुपये मिलता है, तो ऐसे में एलआईसी की वैल्यूएशन करीब 6 लाख करोड़ रुपये होगी। हालांकि पहले सरकार ने एलआईसी की बाजार वैल्यू करीब 17 लाख करोड़ रुपये होने का अंदाजा लगाया था।
इसी हफ्ते एलआईसी आईपीओ पर हो सकता है फैसला
रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने 1 अधिकारी के हवाले से जानकारी दी है कि सरकार अगले 2 हफ्तों में एलआईसी के शेयर लिस्ट करना चाहती है। इससे पहले गुरुवार को पीटीआई न्यूज एजेंसी ने भी एक रिपोर्ट में कहा था कि एलआईसी के आईपीओ को लॉन्च करने के बारे में सरकार इसी हफ्ते फैसला ले सकती है। जानकारी के अनुसार आईपीओ से जुड़ा ज्यादातर काम पूरा हो चुका है।
सरकार के पास 12 मई तक का समय
सरकार के पास सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास अप्रूवल के लिए नए दस्तावेज दाखिल किए बिना आईपीओ लांच करने का 12 मई 2022 तक का समय है।


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