ईमानदारी से लोन चुकाने वालों पर सरकार मेहरबान, मिलेगा 32 हजार रु तक का कैशबैक

नयी दिल्ली। कोरोना संकट के मद्देनजर मार्च से अगस्त तक 6 महीनों की अवधि के लिए आरबीआई ने लोन मोरेटोरियम की सुविधा दी थी। यानी आप चाहें तो इन महीनों की अपनी ईएमआई टाल सकते हैं। मगर बैंकों ने इस अवधि के ब्याज पर भी ब्याज लगाया। ब्याज पर ब्याज का यही मामला सुप्रीम कोर्ट में है। पर अदालत ने उधारकर्ताओं को ब्याज पर ब्याज से राहत देने के लिए सरकार को जल्द से जल्द एक योजना लागू करने को कहा था। सरकार ने इस खर्चे को खुद वहन करने का ऐलान किया और अब किसे ब्याज पर ब्याज से छूट मिलेगी इसके लिए दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं। मगर इस पूरी स्टोरी में उन्हें क्या लाभ मिला जिन्होंने पूरी ईमानदारी से इन 6 महीनों में भी लोन की ईएमआई भरी? अभी तक ऐसे लोगों को कुछ नहीं मिला। पर अब ऐसे ही लोगों को कैशबैक मिलेगा।

किसे और कैसे मिलेगा कैशबैक

किसे और कैसे मिलेगा कैशबैक

ये कैशबैक सभी व्यक्तिगत लोन लेने वालों और छोटे बिजनेसों को मिलेगा। अब समझिए कैसे मिलेगा कैशबैक। सरकार चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर को लोन मोरेटोरियम का फायदा लेने वालों की तरफ से अदा करेगी। चक्रवृद्धि ब्याज और साधारण ब्याज का यही अंतर उन लोन ग्राहकों कैशबैक के रूप में मिलेगा जिन्होंने समय पर ईएमआई चुकाई। सरकारी योजना के तहत समय पर ईएमआई का भुगतान करने वाले उधारकर्ताओं को फरवरी 2020 के अंत पर उनका जितना लोन बकाया उस हिसाब से उन पर जितना चक्रवृद्धि ब्याज बनता और उन्होंने जितना साधारण ब्याज चुकाया उसका अंतर दिया जाएगा।

कितना मिलेगा कैशबैक

कितना मिलेगा कैशबैक

इस स्कीम के तहत आपको 32 हजार रु तक का कैशबैक मिल सकता है। एक गणना के अनुसार जिन लोगों ने समय पर 2 करोड़ रुपये के होम लोन पर ईएमआई का भुगतान किया उन्हें लगभग 32,000 रुपये का कैशबैक मिलेगा। यहां 8 फीसदी की अनुमानित ब्याज दर के हिसाब से गणना की गई है। इस ब्याज दर के नतीजे में 8 लाख रुपये का अर्धवार्षिक ब्याज और 32,538 रुपये का चक्रवृद्धि ब्याज बनता। अब यही 32,538 रुपये समय पर ईएमआई चुकाने वालों को कैशबैक के रूप में मिलेंगे। बैंक ये पैसा आपके खाते में क्रेडिट करके बाद में सरकार से पैसा लेंगे।

सरकार पर 6500 करोड़ रु का बोझ

सरकार पर 6500 करोड़ रु का बोझ

ब्याज पर ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। सरकार को इस योजना के तहत 6500 करोड़ रु का अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा था कि ये साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज के बीच का अंतर वहन करने को तैयार है। हाउसिंग लोन, एजुकेशन लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, ऑटो लोन, एमएसएमई लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन और कंजम्पशन लोन इस योजना के दायरे में हैं।

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