नई दिल्ली, जुलाई 20। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में नरमी के बाद विंडफॉल टैक्स और एक्सपोर्ट लेवी को कम कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। घरेलू रूप से उत्पादित कच्चे तेल पर लगने वाले कर को भी 23,250 रुपये प्रति टन से घटाकर 17,000 रुपये प्रति टन कर दिया और डीजल पर निर्यात पर 2 रुपये और विमानन-ईंधन निर्यात में 2 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इसमें विशेष से आर्थिक क्षेत्र से किए जाने पर निर्यात पर लगाए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भी छूट दी गई है।
रिलायंस और इन जैसी अन्य कम्पनी को लाभ
अधिसूचना में कहा गया है, "सरकार, इस बात से संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना जनहित में आवश्यक है, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित इकाइयों से निर्यात किए जाने पर उत्पाद शुल्क योग्य वस्तुओं को छूट देता है।" इस कदम से शीर्ष ईंधन निर्यातकों को राहत मिलेगी उद्योग और राज्य द्वारा संचालित तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम। 1 जुलाई से सरकार ने तेल कारोबार से जुड़ी कंपनी को होने वाले अप्रत्याशित लाभ कर लगा दिया था। इसने निर्यातकों को पहले घरेलू बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी अनिवार्य किया है। सरकार के इस फैसले से रिलायंस और इन जैसी अन्य कम्पनी को लाभ होगा
भारत में उत्पादित कच्चे तेल पर टैक्स
सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, तेल कंपनियों को पेट्रोल के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर का भुगतान करना था। वहीं, अपस्ट्रीम निर्माता को भारत में उत्पादित कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का टैक्स देना होगा।
हर 15 दिनों में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा
केंद्र ने पहले ही घोषणा कि थी वह हर 15 दिनों में विंडफॉल टैक्स की समीक्षा करेगी। रिलायंस और रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी लिमिटेड भारत के एक मात्र निजी स्वामित्व वाले रिफाइनर, भारत के कुल गैसोलीन और डीजल निर्यात का 80 प्रतिशत से 85 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।


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