नई दिल्ली, मार्च 13। बाजार नियामक सेबी ने एलआईसी के आईपीओ को हरी झंडी दिखा दी है। सरकार की योजना मार्च के पहले हफ्ते में एलआईसी का आईपीओ लाने की थी। मगर रूस-यूक्रेन विवाद के बीच शेयर बाजार में आई अस्थिरता के चलते सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए। अब जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार एलआईसी आईपीओ लाने के लिए सरकार के पास 12 मई तक का समय है। यदि ऐसा नहीं होता है तो सरकार को एलआईसी के आईपीओ के लिए सेबी के पास नए कागजात दाखिल करने होंगे। क्योंकि सेबी की मंजूरी के बाद किसी भी कंपनी को एक समयसीमा के अंदर ही आईपीओ लाना होता है।
31.6 करोड़ शेयरों की बिक्री
सरकार एलआईसी के आईपीओ में लगभग 31.6 करोड़ शेयर या 5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री करेगी। इससे सरकार को लगभग 60,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। रूस-यूक्रेन संकट से शेयर बाजार अत्यधिक अस्थिर है। इसलिए सरकार एलआईसी का आईपीओ लाने से कतरा रही है। 13 फरवरी को, सरकार ने सेबी के पास आईपीओ के लिए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दायर किया था, जिसने पिछले सप्ताह अपनी मंजूरी दे दी थी।
जानिए पूरा नया नियम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेबी के पास दायर डीआरएचपी में एलआईसी के वित्तीय परिणामों और सितंबर 2021 तक की एम्बेडेड वैल्यू की डिटेल थी। अगर सरकार 12 मई तक की उपलब्ध विंडो से चूक जाती है, तो एलआईसी के दिसंबर तिमाही के नतीजे बताते हुए सेबी के पास नए पेपर दाखिल करने होंगे और एम्बेडेड वैल्यू को भी अपडेट करना होगा।
कितनी है एम्बेडेड वैल्यू
एलआईसी की एम्बेडेड मूल्य, जो एक बीमा कंपनी में कुल शेयरधारकों की वैल्यू का एक माप है, अंतरराष्ट्रीय बीमांकिक फर्म मिलिमन एडवाइजर्स द्वारा 30 सितंबर 2021 तक लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपये आंकी गयी थी। हालांकि डीआरएचपी एलआईसी के बाजार मूल्यांकन का खुलासा नहीं करती है, जो कि उद्योग मानकों के अनुसार एम्बेडेड वैल्यू की लगभग 3 गुना होगी।
सरकार का विनिवेश लक्ष्य
सरकार चालू वित्त वर्ष में 78,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए जीवन बीमा फर्म एलआईसी के लगभग 31.6 करोड़ या 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की उम्मीद कर रही थी। यदि मार्च तक शेयर बिक्री नहीं होती है, तो सरकार संशोधित विनिवेश लक्ष्य को भी प्राप्त करने से चूक जाएगी।
सबसे बड़ा आईपीओ
एलआईसी का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। एक बार लिस्टेड होने के बाद एलआईसी की मार्केट वैल्यू रिलायंस और टीसीएस जैसी टॉप कंपनियों के करीब बराबर होगी। अब तक 2021 में पेटीएम का आईपीओ (18,300 करोड़ रुपये) सबसे बड़ा था। इसके बाद कोल इंडिया (2010) लगभग 15,500 करोड़ रुपये और रिलायंस पावर (2008) का 11,700 करोड़ रुपये का आईपीओ था। बता दें कि एलआईसी के आईपीओ में पॉलिसीधारकों और एलआईसी कर्मचारियों छूट दी जाएगी। मगर कितनी इस बात का खुलासा नहीं हुआ। नियमों के मुताबिक, इश्यू साइज का 5 फीसदी तक कर्मचारियों के लिए और 10 फीसदी तक पॉलिसीधारकों के लिए आरक्षित किया जा सकता है। चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार को ओएफएस, कर्मचारी ओएफएस, रणनीतिक विनिवेश और बायबैक के जरिए अब तक 12,423.67 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।
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