NPS: केद्र सरकार अपने कर्मचारियों को उनके पिछले ड्रा सैलरी का 40 फीसदी से 45 फीसदी न्यूनतम पेंशन देने का भरोसा दे सकती है।
हालांकि गुरुवार को वित्तीय मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को एक स्पटीकरण जारी किया गया हैं कि नई पेंशन स्कीम पर गठित समिति अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। कहा गया है कि गठित समिति इस समय विचार विमर्श के दौर में है।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है। यह कदम अप्रैल के महीने में सरकार के तरफ से एक समिति के गठन के बाद आया है।

साल 2004 में एक जरूरी राजकोषीय सुधार के बाद अपनी गई वर्तमान पेंशन प्रणाली पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिर से सोचने में मजबूर किया गया है।
क्योंकि कुछ प्रदेशों में एक गारंटीकृत पेंशन को पूर्ण रूप से फुल्ली फंडेड करने की पुरानी और फाइनेंशियल रूप से तनावपूर्ण प्रणाली पर वापस स्विच किया है।
वर्तमान नेशनल पेंशन योजना (एनपीएस) में कर्मचारियों को अपने मिल सैलरी का 10 प्रतिशत और सरकार को 14 फीसदी योगदान करने की जरूरत होती है। आखिरी पेमेंट उस कोष पर मार्केट के रिटर्न पर निर्भर करता है, जिसको अधिकतर गवर्नमेंट कर्ज में इन्वेस्ट किया जाता है।
इसी के विपरित पुरानी पेंशन प्रणाली कर्मचारीयों के लास्ट ड्रॉ सैलरी के 50 फीसदी की फिक्स्ड पेंशन की गारंटी देती है, बिना उनके वर्किंग लाइफ के दौरान कुछ भी योगदान करने की जरूरत नहीं होती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि सरकार जो वर्तमान योजना है इस योजना को संशोधित करने का प्लान कर रही है ताकि जो कर्मचारी है वो और सरकार अभी भी योगदान दे सकें।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारियों को पेंशन के रूप में उनके अंतिम ड्रॉ वेतन का 40 प्रतिशत से 45 प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि लेकिन हम पुरानी पेंशन प्रणाली में वापस नहीं जाएंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों सूत्रों ने कहा कि सरकार का मानना है कि यह समझौता प्रदेश की परेशानियों को दूर करेगा। जो पुरानी पेंशन योजना में चले गए है। पूरे देश को एक फाइनेंशियल रूप से स्थायी पेंशन योजना के साथ कवर किया जाएगा।
कई सारे राज्यों ने हाल ही में जिसमें छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, झारखंड आदि शामिल है। इन्होंने पुरानी पेंशन प्रणाली को वापस लेने का ऑप्शन चुना है। पेंशन केंद्रीय बजट में से बड़े एक्सपेंस मदों में से एक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि संशोधित पेंशन योजना से बजट गणित पर उतना जोर नहीं पड़ेगा। जो वर्तमान रिटर्न है इससे पता चलता है कि कर्मचारियों को उनके पिछले रिटर्न का करीब 38 फीसदी पेंशन के रूप में मिलता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वही, अगर सरकार 40 फीसदी रिटर्न को गारंटी देती है, तो फिर उसे केवल 2 प्रतिशत की कमी को पूरा करना होगा।
वित्त मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को एक ट्वीट करके कहा गया है कि कई न्यूज रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने कर्मचारियों के लिए पेंशन का एक खास प्रतिशत तय लिए जाने का प्रस्ताव दिया है। मगर वित्तीय मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि यह न्यूज रिपोर्ट झूठी है।
वित्तीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय बजट के दौरान पेंशन के मुद्दों पर वित्तीय सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी को गठित करने की घोषणा की थी।
बयान में यह कहा गया है कि यह कमेटी अभी फिलहाल विचार विमर्श में है और हितधारकों के परामर्श करने की प्रोसेस में है। कहा गया है कि कमेटी अभी तक किसी नतीजे में नहीं पहुंची है।
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