नयी दिल्ली। 1980 के बाद पहली बार चालू वित्त वर्ष में भारत सरकार का लोन स्तर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 91 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि आगामी दशक में ये धीरे-धीरे जीडीपी 80 फीसदी तक घट जाएगा। मगर डेब्ट-टू-जीडीपी अनुपात में बढ़ोतरी से 2020 के दशक में खर्च बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने की देश की क्षमता प्रभावित होगी। कोरोना महामारी से भी सरकारी खर्च प्रभावित होगा। डेब्ट-टू-जीडीपी अनुपात दर्शाता है कि किसी देश के अपने लोन का भुगतान करने की कितनी संभावना है। ये अनुपात जितना अधिक होगा, उतना ही कम उस देश के अपना लोन चुकाने की संभावना कम और डिफॉल्ट होने की संभावना बढ़ेगी। निवेशक अक्सर सरकार की लोन की फंडिंग करने की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए इसी अनुपात को देखते हैं।
2018-19 में बढ़ा सरकार का कर्ज
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार का (केंद्र + राज्य) कर्ज जीडीपी के 70 प्रतिशत से बढ़ कर 2019-20 में 75 प्रतिशत हो गया। ये चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 91 प्रतिशत तक और 2021-22 में 91.3 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार अगर किसी देश का डेब्ट-टू-जीडीपी अनुपात लंबी अवधि के लिए 77 प्रतिशत से अधिक रहे तो इससे इकोनॉमिक ग्रोथ धीमा हो जाता है।
घटने में लगेगा बहुत एक दशक
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार कर्ज के स्तर को जीडीपी के 60 प्रतिशत तक लाने में एक और दशक (या इससे भी अधिक) लग सकता है। हालांकि सरकार ने कुछ साल पहले वित्त वर्ष 2024-25 इस लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मानते हुए कि डेब्ट-टू-जीडीपी अनुपात में धीरे-धीरे गिरावट होगी सरकार का प्राथमिक खर्च 2020 दशक के दौरान लगभग 7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले दशक के 11.3 प्रतिशत से कम है। साथ ही ये 1970 के दशक से सबसे धीमी वृद्धि को दर्शाता है।
कितनी रहेगी जीडीपी ग्रोथ
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगले दशक में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 5-6 प्रतिशत तक धीमी हो जाएगी, जबकि 2010 के दशक में यह 7 प्रतिशत थी। यह बात ध्यान रखने वाली है कि व्यक्तिगत खपत और सरकारी खर्च पिछले कुछ वर्षों में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ के प्रमुख फैक्टर रहे हैं। पिछले छह वर्षों में राजकोषीय खर्च (खपत + निवेश) आर्थिक गतिविधि के प्रमुख चालकों में से एक रहा है। वित्त वर्ष 2013-14 से वित्त वर्ष 2019-20 के बीच वास्तविक जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत रही, जबकि इस दौरान वास्तविक राजकोषीय खर्च औसतन 9 प्रतिशत बढ़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकारी खर्च का जीडीपी ग्रोथ में लगभग एक चौथाई योगदान रहा है।
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