नयी दिल्ली। गृह मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों को झटका दिया है। गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि ई-कॉमर्स कंपनियां को लॉकडाउन के दौरान सिर्फ जरूरी सामानों की आपूर्ति करने की ही होगी। यानी गैर-जरूरी सामानों की बिक्री करने की इजाजत ई-कॉमर्स कंपनियों को लॉकडाउन के बाद ही मिलेगी। हालांकि कुछ दिन पहले सरकार की तरफ से ई-कॉमर्स कंपनियों को 20 अप्रैल से मोबाइल फोन, रेफ्रिजरेटर, कपड़े, टेलीविजन सेट और लैपटॉप जैसी गैर-जरूरी चीजों की बिक्री की इजाजत दे दी गई थी। मगर अब गृह मंत्रालय ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि लॉकडाउन के दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा गैर-जरूरी सामानों की आपूर्ति पर रोक बरकरार रहेगी।

पिछले हफ्ते दी थी छूट
पिछले हफ्ते सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कुछ गैर-जरूरी सामानों की बिक्री को हरी झंडी दिखा दी थी। इन सामानों को उन चीजों की लिस्ट में शामिल किया गया था जिनकी 20 अप्रैल यानी कल से बिक्री को मंजूरी दे दी गई है। मगर सरकार को इस फैसले के लिए भारतीय व्यापारी संघ (सीएआईटी) की तरफ से आलोचना का सामना करना पड़ा था। सीएआईटी के सेक्रेटरी-जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने कहा था कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से 40 लाख से अधिक व्यापारी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्हें अनदेखा करते हुए ई-कॉमर्स कंपनियों को 20 अप्रैल से गैर-जरूरी सामान पहुंचाने की अनुमति दी गई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ ने की बैठक
शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 20 अप्रैल के बाद सुरक्षित क्षेत्रों में चुनिंदा आर्थिक गतिविधियों और सेवाओं को चालू करने पर चर्चा करने के लिए एक बैठक का नेतृत्व किया। बैठक के बाद सरकार ने उन कारोबारों और सेवाओं की एक सूची जारी की जो 20 अप्रैल से देश के कुछेक उन हिस्सों में शुरू होंगी जहां कोरोना वायरस का प्रकोप सबसे कम है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि इन गतिविधियों और सेवाओं को कोरोनावायरस हॉटस्पॉट में अनुमति नहीं दी जाएगी।
लॉकडाउन के फाएदे और नुकसान
हालांकि लॉकडाउन को लाखों लोगों की जान बचाने का श्रेय दिया गया है। केंद्र ने दावा किया है कि अगर लॉकडाउन न होता तो 8.2 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो सकते थे। मगर लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। आईएमएफ ने कहा है कि इस साल भारत की अर्थव्यवस्था में केवल 1.9 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इतना ही नहीं लॉकडाउन के कारण भारत की अर्थ्वयवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।


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