नई दिल्ली, मई 23। सरकार चालू वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और आईटीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। पवन हंस, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई), आईडीबीआई बैंक और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की स्ट्रेटेजिक बिक्री में देरी और भारतीय बीमा निगम (एलआईसी) के कम साइज के आईपीओ ने सरकार को अन्य ऑप्शनों पर विचार करने पर मजबूर कर दिया है, जिनमें हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड और आईटीसी में अपनी हिस्सेदारी बेचना शामिल है।
कितनी है हिस्सेदारी
केंद्र की हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में लगभग 37,000 करोड़ रु की 29.54 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि इसके पास आईटीसी में इसकी 7.91 फीसदी हिस्सेदारी है, जो यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया के माध्यम से है। बीएसई पर शुक्रवार के बंद भाव के आधार पर यह 27,000 करोड़ रु होती है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) और विनिवेश की सीमा की डिटेल अभी भी तैयार किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि सितंबर तक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
कितना है विनिवेश लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 65,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य का लक्ष्य रखा है। एलआईसी के पब्लिक इश्यू ने इस महीने की शुरुआत में लगभग 20,560 करोड़ रु जुटाए। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एचजेडएल और आईटीसी में हिस्सेदारी की बिक्री पर आंतरिक चर्चा शुरू कर दी है। एक अधिकारी के अनुसार हमने अपनी रणनीति पर फिर से काम किया। बाजार की मौजूदा स्थिति में भी, हमें उम्मीद है कि इनमें हिस्सेदारी बिक्री से हमें 64,000 करोड़ रु मिलेंगे।
कैबिनेट के पास जाएगा प्रस्ताव
अधिकारी के अनुसार कि दीपम ओएफएस के तकनीकी पहलुओं पर काम कर रहा है और नोट को कैबिनेट की मंजूरी के लिए 15 जून तक भेजा जाएगा। अधिकारी ने कहा, कि हम सितंबर से पहले इन्हें पूरा करने का लक्ष्य बना रहे हैं। लेकिन वैश्विक स्थिति को देखते हुए, फैक्टर हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। इसलिए एक निश्चित समयरेखा देना बुद्धिमानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हमने फ्लेक्सिबिलिटी रखी है।
वेदांत के साथ क्या है मामला
मुकदमा वापस लेने के बाद विभाग ने पिछले हफ्ते वेदांत समूह के साथ कुछ प्रारंभिक चर्चा की गयी है। 2002 में विनिवेश के पहले दौर में इसे हासिल करने के बाद, वेदांत के पास एचजेडएल में बहुमत हिस्सेदारी है। केंद्र ने चालू वित्त वर्ष में अब तक विनिवेश के माध्यम से लगभग 23,575 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसमें से 20,560 करोड़ रु एलआईसी आईपीओ से और 3,000 करोड़ रु सरकारी एक्सप्लोरर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड में 1.5 फीसदी की बिक्री से रहा।
बीपीसीएल की रणनीतिक बिक्री
बीपीसीएल की रणनीतिक बिक्री को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के मद्देनजर निवेशकों की कमजोर प्रतिक्रिया के कारण रोक दिया गया है। एससीआई का विनिवेश भी समय से पीछे चल रहा है, हालांकि सरकार को चालू वित्त वर्ष में इसकी ट्रांजेक्शन पूरा होने की उम्मीद है। बताते चलें कि सरकार गैर-प्रमुख संपत्तियों के अलग होने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सितंबर तक शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के लिए फाइनेंशियल बिड आमंत्रित कर सकती है। रणनीतिक बिक्री प्रक्रिया के तहत सरकार शिपिंग हाउस और पुणे में प्रशिक्षण संस्थान और एससीआई की कुछ अन्य गैर-प्रमुख संपत्तियों को बंद कर रही है।
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