नई दिल्ली। अगर सब कुछ ठीक चला तो लोगों का न्यूनतम वेतन 28 फीसदी तक बढ़ सकता है। केन्द्र सरकार न्यूनतम वेतन एक मसौदा तैयार कर रही है। जानकारी के अनुसार 4 महीने के अंदर इसे फाइनल रूप दिया जा सकता है। मोदी सरकार इसके लिए नए मानकों को आधार मान कर चल रही है, जिससे 28 फीसदी तक वेतन बढ़ने की उम्मीद है।

न्यूनतम वेतन तय किया जा रहा
सरकार की तरफ से जारी मसौदे के अनुसार सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड (केंद्रीय सलाहकार बोर्ड) पहली बार वेतन तय करेगा। इसकी तरफ से तय किया गया वेतन केन्द्र और राज्य में नई न्यूनतम मजदूरी के लिए लागू किया जाएगा। 2019 मजदूरी कोड एक वैधानिक राष्ट्रीय मजदूरी मुहैया कराती है। कोई भी राज्य इसकी तरफ से तय न्यूनतम से कम वेतन नहीं दे सकता है। उम्मीद है कि इस मसौदे पर 4 महीने के भीतर सलाह और सुझाव मिलने के बाद अंतिम रूप दे दिया जाएगा। अभी वेतन को एक एडवाइजरी बोर्ड पर छोड़ दिया गया है, जो कि न्यूनतम मजदूरी देने के लिए गाइडलाइंस जारी करते हैं।
जानकारों की राय
एक जानकार के अनुसार निर्धारित मानदंड़ों का पालन करते हुए इसकी गणना क जानी चाहिए। अगर न्यूनतम मजदूरी 14 से 28 फीसदी तक बढ़ती है तो देश न्यूनतम वेतन रोज का बढ़कर 200 रुपये से 225 रुपये के बीच हो जाएगा। क्योंकि अभी कुछ राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 175 रुपये प्रति दिन है।
सावतें वेतन आयोग ने यह तय की थी मजदूरी
सातवें वेतन आयोग ने 2015 में न्यूनतम मजदूरी 18,000 रुपये प्रति माह तय की थी। यह वेतन केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी निर्धारित करते समय महीने में 26 दिन काम करने वालों पर 692 रुपये प्रति दिन के हिसाब से तय किया गया था। श्रम मंत्रालय के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग कि सिफारिश पर 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन तय किया गया है, जो कि वतेन वृद्धि के मापदंड के लिए जरूरी होगा।
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