नई दिल्ली, सितंबर 15। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक पैकेज को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि राहत पैकेज पूरे सेक्टर के लिए होगा और "किसी खास कंपनी के लिए नहीं"। इस पैकेज से वोडाफोन आइडिया जैसे कमजोर दूरसंचार ऑपरेटरों को बहुत अधिक फायदा मिलेगा, जिन्हें पिछले वैधानिक बकाया (एजीआर) के रूप में हजारों करोड़ रुपये का भुगतान करना है।

क्या होंगे सरकार के कदम
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि सरकार द्वारा किसी प्राइवेट कंपनी को इस तरह से राहत देने की कोई मिसाल नहीं है। तो यह सवाल ही नहीं था। बाकी टेलीकॉम सेक्टर के लिए शॉर्ट और लॉन्ग टर्म दोनों तरीके के उपाय हैं, जिन पर हमने निर्णय लिया है। विभिन्न राहत उपायों की योजना बनाई जा रही है और संभावना है कि स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) और लाइसेंस शुल्क में कमी इनमें से एक कदम हो सकता है।
अभी कितना है एजीआर
वर्तमान में टेलीकॉम कंपनी एसयूसी के रूप में समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का लगभग 3-5 प्रतिशत भुगतान करती हैं, जबकि लाइसेंस शुल्क के रूप में ये एजीआर का लगभग 8 प्रतिशत भुगतान करती हैं। इनके अलावा, स्पेक्ट्रम खरीद के लिए भुगतान, जिसे 2019 में दो साल (2020-21 और 2021-22) तक के लिए टाल दिया गया था, को भी अधिकतम पांच साल के लिए बढ़ाए जाने की संभावना है।
वीआई और एयरटेल को थी राहत की जरूरत
तीन प्राइवेट कंपनियों में से वोडाफोन आइडिया (वीआई) और भारती एयरटेल ने भुगतान किए गए शुल्क में कमी के रूप में सरकार से इस तरह की राहत की मांग की थी। यानी ये कंपनियां चाहती थीं कि लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और दूरसंचार विभाग को भुगतान किए जाने वाले बकाया के लिए ब्याज दरों में कमी की जाए। कहा जा रहा है कि राहत पैकेज के बाकी कदम वही होंगे, जिनकी उम्मीद की जा रही है।


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