भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अगस्त 2025 में होने वाली बैठक में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं की जा रही है। महंगाई दर (CPI) भले ही जनवरी 2019 के बाद सबसे नीचे पहुंच गई हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।

RBI 6 अगस्त को रेपो दर को 5.5% पर रख सकता है स्थिर
GoodReturns की ओर से 62 अर्थशास्त्रियों पर किए गए सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI 6 अगस्त को होने वाली समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.5% पर ही स्थिर रखेगा। अगर ऐसा होता है तो ये FY26 की पहली बैठक होगी जिसमें दरों को बिना बदलाव के रखा जाएगा।
अब तक 100 बेसिस पॉइंट की कटौती
2025 में RBI अब तक तीन बार रेपो रेट में कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट 6.5% से घटकर 5.5% पर आ गया है। साथ ही, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को भी सितंबर से धीरे-धीरे घटाकर 4% से 3% तक लाने की योजना है, जिससे बैंकिंग सिस्टम में अधिक तरलता आएगी।
क्यों RBI ने रोक दी दरों में कटौती?
BofA सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया का मानना है कि RBI अब पॉलिसी बदलावों के असर को देखने के लिए कुछ समय तक रणनीतिक सब्र अपनाएगा। पहले ही चार बैठकों में दरों में कटौती की गई है, इसलिए अब समय है कि उनके प्रभाव को देखा जाए।
अक्टूबर में मिल सकती है राहत
हालांकि अभी तो कोई नई कटौती की संभावना नहीं है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अक्टूबर 2025 में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती हो सकती है। यह त्योहारी सीजन में कर्ज और हाउसिंग सेक्टर को सपोर्ट देने का काम कर सकती है।
मुद्रास्फीति अब 2.1% पर छह साल में सबसे कम
जून 2025 में CPI आधारित महंगाई दर 2.1% रही, जो लगातार आठवां महीना है जब इसमें गिरावट आई है। यह दर RBI के 4% के टारगेट से भी काफी नीचे है। इस कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल महंगाई चिंता का विषय नहीं है।
लाइसेंसिंग, नीतियों और अनुमान पर क्या कहना है?
RBI ने जून में FY26 के लिए GDP ग्रोथ 6.5% और महंगाई अनुमान 3.7% रखा था।
बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री जाह्नवी प्रभाकर का कहना है कि जब तक महंगाई लक्षित दायरे में है, तब तक दरों में कटौती की जरूरत नहीं है।
SLR, SDF और अन्य दरों का हाल
SDF (Standing Deposit Facility) दर: 5.25%
बैंक दर और MSF (Marginal Standing Facility): 5.75%
SLR (Statutory Liquidity Ratio): 18% पर बनी हुई है।
RBI अभी अपनी नीति को स्थिर रखने के पक्ष में है, ताकि पहले से किए गए बदलावों का असर सामने आ सके। महंगाई के आंकड़े राहत दे रहे हैं, लेकिन RBI किसी भी बड़ी नीति बदलाव से पहले स्थिति को पूरी तरह समझना चाहता है। यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं, तो अक्टूबर में एक और दर कटौती संभव है।
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