नई दिल्ली, अगस्त 16। आम जनता के लिए एक अच्छी खबर आई है। जुलाई में थोक महंगाई में गिरावट दर्ज की गयी है। इससे पहले पिछले हफ्ते सामने आए आंकड़ों में खुदरा महंगाई में भी गिरावट देखने को मिली थी। जुलाई 2021 में भारत का थोक मूल्य सूचकांक (थोक महंगाई दर) सालाना आधार पर 11.16 प्रतिशत तक घट गया। मई में भारत में थोक महंगाई 12.94 फीसदी के रिकॉर्ड उच्च स्तर तक पहुंच गयी थी। इसके बाद थोक महंगाई घटी है। मगर अभी भी यह काफी अधिक है। थोक मुद्रास्फीति के इतना अधिक होने के पीछे पिछले साल इसका काफी कम होना और कच्चे तेल और विनिर्मित वस्तुओं की बढ़ना अहम कारण हैं। पिछले महीने भी थोक महंगाई 12.07 फीसदी थी।

क्यों घटी थोक महंगाई
फ्यूल एंड पावर इंडेक्स में आई गिरावट से पिछले महीने थोक महंगाई कम हुई। फ्यूल एंड पावर इंडेक्स जून में 3.55 फीसदी से गिर कर जुलाई में 0.53 फीसदी पर आ गया। खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने कम हुई, और जुलाई में 'शून्य' प्रतिशत पर रही, जो जून में 3.09 प्रतिशत थी, जबकि प्याज की कीमतों में तेजी आई। प्याज पर महंगाई दर 72.01 फीसदी के उच्च स्तर पर रही।
क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस
कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की मुद्रास्फीति जुलाई में 40.28 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 36.34 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों पर मुद्रास्फीति जुलाई में 11.20 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने में 10.88 प्रतिशत थी। बता दें कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी जाने वाली देश की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई महीने में कम होकर 5.59 प्रतिशत पर आ गई।
जून में खुदरा महंगाई
जून महीने में खुदरा महंगाई दर 6.26 फीसदी थी। तीन महीने में यह पहली बार है जब सीपीआई डेटा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 फीसदी के ऊपरी मार्जिन से नीचे आया है। इससे पहले लगातार दो महीने सीपीआई 6 फीसदी के ऊपर आ गया था।


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