नयी दिल्ली। देश में बेरोजगारी दर में भारी गिरावट आई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़े बताते हैं कि मई में 23.48 फीसदी के मुकाबले जून में बेरोजगारी घट कर 10.99 फीसदी रह गई। इसे देश में नौकरी के परिदृश्य में सुधार का संकेत माना जा रहा है। सीएमआईई के अनुसार जून में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 12.02 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 10.52 प्रतिशत दर्ज की गई। अलग-अलग राज्यों में देखें तो हरियाणा में बेरोजगारी की दर सबसे अधिक 33.6 प्रतिशत रही। इसके बाद त्रिपुरा में 21.3 प्रतिशत और झारखंड में 21 प्रतिशत बेरोजगारी दर देखने को मिली।

कितने लोगों के पास रोजगार
सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार जून में देश में 37.3 करोड़ लोगों के पास रोजगार रहा. मगर नौकरी की तलाश करने वालों की संख्या 46.1 करोड़ है। जून में देश की रोजगार दर 35.9 प्रतिशत दर्ज की गई। भारत में बेरोजगारी दर जनवरी के बाद से 25.52 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन है। इसके बाद अप्रैल में भी बेरोजगारी दर 23.48 प्रतिशत रही, क्योंकि अधिकांश आर्थिक गतिविधियां रुक गई थीं। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में लगभग 12.2 करोड़ लोगों की नौकरियां चली गईं थीं।
मार्च में कितनी थी रोजगार दर
मार्च में रोजगार दर 8.75 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि जनवरी और फरवरी में यह क्रमश: 7.22 प्रतिशत और 7.76 प्रतिशत रही। सीएमआईई के एमडी के अनुसार बेरोजगारी की दर में गिरावट आई है और साथ ही भागीदारी दर (काम कर रहे लोगों की संख्या) लॉकडाउन से पहले की अवधि के करीब पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में बेरोजगारी की दर में सुधार का कारण सरकार द्वारा मनरेगा के खर्च में की गई वृद्धि और खरीफ बुवाई में बढ़ोतरी है।
मनरेगा की रोल अहम
करीब एक सप्ताह पहले सीएमआईई की एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया था कि लॉकडाउन में राहत मिलने से बेरोजगारी को कम करने में मदद मिली है, लेकिन ग्रामीण भारत में लोगों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में भारी वृद्धि से लाभ हुआ है। खरीफ की बुवाई में भी अच्छा खासा इजाफा हुआ है। अनुमान लगाया गया था कि ग्रामीण बेरोजगारी के कम से कम अक्टूबर 2020 तक कम रहने की उम्मीद की जा सकती है।


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