नई दिल्ली, अगस्त 12। महंगाई के मामले में एक अच्छी खबर आई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी जाने वाली देश की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई महीने में कम होकर 5.59 प्रतिशत पर आ गई। वहीं औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में मापा जाने वाले फैक्ट्री उत्पादन में साल दर साल आधार पर जून में 13.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। महंगाई और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए हैं।

जून में कितनी थी खुदरा महंगाई
जून महीने में खुदरा महंगाई दर 6.26 फीसदी थी। तीन महीने में यह पहली बार है जब सीपीआई डेटा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 फीसदी के ऊपरी मार्जिन से नीचे आया है। इससे पहले लगातार दो महीने सीपीआई 6 फीसदी के ऊपर आ गया था। सरकार ने केंद्रीय बैंक को मार्च 2026 को समाप्त होने वाली पांच साल की अवधि के लिए खुदरा मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के मार्जिन के साथ 4 प्रतिशत पर बनाए रखने के लिए कहा है।
एमपीसी के लिहाज सीपीआई अहम
सीपीआई डेटा पर आरबीआई मुख्य रूप से अपनी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति बनाते समय ध्यान देता है। पिछले हफ्ते, केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को लगातार सातवीं बार 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) या खाद्य महंगाई भी जुलाई में महीने दर महीने आधार पर घट कर 3.96 प्रतिशत रह गई, जो जून में 5.15 प्रतिशत थी।
क्या हुआ महंगा
खाद्य और पेय पदार्थों के अलावा फ्यूल और लाइट सेगमेंट में जुलाई में 12.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कपड़े और जूते पर 6.46 प्रतिशत और हाउसिंग सेगमेंट में 3.86 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सब्जियों की कीमतों में (-)7.75 प्रतिशत और अनाज और उत्पादों में (-)1.75 प्रतिशत की गिरावट खुदरा महंगाई के कम होने के पीछे अहम कारण रहे। तेल और फैट की कीमतों में 32.53 प्रतिशत और अंडे की कीमतों में 20.82 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके अलावा दालों और उत्पादों की कीमतों में 9.04 प्रतिशत और फलों में 8.91 प्रतिशत की वृद्धि हुई। गैर-मादक पेय पदार्थों के दाम भी 14.44 प्रतिशत चढ़े।
आईआईपी के आंकड़े विस्तार से जानिए
जून के महीने में भारत का फैक्ट्री उत्पादन सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत बढ़ कर 122.6 हो गया। आंकड़ों से पता चला है कि जून 2020 में आईआईपी (-)16.6 फीसदी गिरकर 107.9 फीसदी पर आ गया था। ऐसा मुख्य रूप से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण हुआ था, जो पिछले साल कोरोनावायरस महामारी की पहली लहर को रोकने के लिए लगाया गया था। विनिर्माण क्षेत्र में जून में सालाना आधार पर 13.0 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 121.0 पर पहुंच गया, जबकि खनन क्षेत्र में 23.1 प्रतिशत की वृद्धि हुआ और यह 105.5 पर पहुंच गया। बिजली क्षेत्र का उत्पादन भी 8.3 प्रतिशत बढ़कर 169.1 हो गया।
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