
Sahara Group : देश के करोड़ों ऐसे निवेशक जिन्होंने सहारा ग्रुप की कंपनियों में अपने पैसे को फंसाकर बैठे है। उन निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर आ गई है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि उन निवेशकों की राशि को आने वाले 9 महीने में लौटा दिया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सरकार को तरफ से कहा गया हैं कि सहारा ग्रुप की 4 सहकारी समितियों के 10 करोड़ निवेशकों को उनके जो पैसे है। उन पैसों को 9 महीने में वापस कर दिया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्देश दिया गया था कि 5 हजार करोड़ रु को सहारा सेबी फंड अकाउंट से केंद्रीय पंजीयक को स्थानांतरित किया जाए। केंद्र सरकार की इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। जिसमें जमाकर्ताओं को भुगतान के लिए सहारा ग्रुप द्वारा सेबी के पास जमा कराए 24 हजार करोड़ रु की जो राशि है। इस जमा 24 हजार करोड़ रु को राशि में से 5 हजार करोड़ रु की रहा को केंद्रीय पंजीयक को स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था।

न्यायमूर्ति रेड्डी ने 9 महीने में इस भुगतान की प्रोसेस को पूरा करेंगे
एक जनहित याचिका में केंद्र सरकार के द्वारा न्यायालय से यह आवेदन दिया था। पिनाकी पाणि मोहंती नाम एक व्यक्ति के द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई थी। इस जनहित याचिका में कई सारी चिट फंड कंपनियों तथा सहारा क्रेडिट कंपनियों में इन्वेस्ट करने वाले जो जमाकर्ता है। इन जमाकर्ताओं को इस राशि को भुगतान करने का निर्देश का आदेश किया गया था। न्यायमूर्ति एमआर शाह और सीटी रविकुमार की पीठ को तरफ से कहा गया है कि सहारा ग्रुप की सहकारी समितियां द्वारा जो ठगे गए एनके जमाकर्ता है उनके बीच इन राशियों का वितरण किया जाना चाहिए। इसमें यह कहा गया है कि यह जो पूरी प्रोसेस है इन प्रोसेस की निगरानी शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी करेंगे। सहकारिता मंत्रालय की तरफ से अपने एक बयान में यह कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय की तरफ से ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है और यह कहा गया है कि सहारा ग्रुप की 4 सहकारी समितियों के दस करोड़ निवेशकों को सहारा-सेबी रिफंड खाते से वापस करने का निर्देश दिया है। उसने कहा है कि न्यायमूर्ति रेड्डी ने
9 महीने में इस भुगतान की प्रोसेस को पूरा करेंगे।
सहारा सेबी फंड में कुल 24979 करोड़ रु की राशि जमा थी
देश के करोड़ों निवेशकों की जिंदगी भर की कमाई सहारा ग्रुप को चार कोऑपरेटिव सोसाइटीज में पड़ा हुआ है। कई सारे लोग है। जिन्हे अपने ही रुपयों को पाने के लिए काफी कठिनाई उठानी पड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा वर्ष 2012 में सहारा रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग को 25,781 करोड़ रु की राशि को डिपॉजिट करने का ऑर्डर दिया था। वर्ष मार्च 2008 और अक्टूबर 2009 में सहारा रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग ने करोड़ों इनवेस्टर्स से इतनी राशि को जुटाई थी। सहारा रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग इन दोनों कंपनियों ने 15,569 करोड़ रुपये को राशि को जमा कराए जिस पर 9,410 करोड़ रुपये ब्याज बना है। इस तरह जो सहारा सेबी फंड है इस फंड में कुल 24979 करोड़ रु की राशि जमा थी। इसमें कुछ लोगों को रिफंड दिया गया हैं इसके बाद अब भी इस खाते में23937 करोड़ रु को राशि जमा है।

सेबी ने सहारा ग्रुप को किसी भी रूप में पब्लिक से पैसा जुटाने पर पाबंदी लगा दी थी
जो सहारा ग्रुप की कंपनियां थी इन कंपनियों की आपस में साथ गांठ थी। इन कंपनियों ने निवेशकों के मिले पैसों की लॉन्ड्रिंग की ओर इन्होंने निवेशकों के पैसे को एक एसेट में लगाया। देश के करोड़ों लोगों ने सहारा ग्रुप की कंपनियों में निवेश किया था इसके साथ ही सहारा ग्रुप की योजनाओं में भी निवेश किया था। सहारा ग्रुप ने आईपीओ लाने का प्लान किया इसके लिए सहारा ग्रुप ने आईपीओ के लिए जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पास आवेदन किया तो फिर सेबी के द्वारा कंपनी का पूरा बायोडाटा मांगा गया। इसके बाद सेबी के द्वारा जांच की गई। तब सेबी को इसमें काफी अधिक गड़बड़ियां मिली। इसके बाद सहारा इंडिया पर सेबी का शिकंजा कसता चला गया। इसके बाद सहारा पर आरोप लगे की सहारा ने निवेशकों के पैसे का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। इसके बाद सेबी की तरफ से 24 नवंबर 2010 को सहारा ग्रुप के किसी भी रूप में पब्लिक से पैसा जुटाने पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद यह जो मामला था कोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद कोर्ट के द्वारा सहारा ग्रुप को इनवेस्टर्स की मनी को 15 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटने का आदेश दिया गया। यह जो रहा थी यह राशि 24,029 करोड़ रु थी।

रिफंड अब तक
संसद में सरकार के तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार,भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को 81.70 करोड़ रु की कुल राशि के लिए 53,642 ओरिजिनल बॉन्ड सर्टिफिकेट/पास बुक से जुड़े 19,644 आवेदन मिले है। सेबी को तरफ से इनमें से कुल 138.07 करोड़ रु को राजी 48,326 ओरिजिनल बॉन्ड सर्टिफिकेट/ पास बुक वाले 17,526 एलिजिबल बॉन्डहोल्डर्स को रिफंड किया गया है। इसमें 70.09 करोड़ रु मूल धन है ।इसके साथ ही इसमें 67.98 करोड़ रु का ब्याज भी शामिल है।


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