
Repo rate news : बढ़ती महंगाई के प्रभावो से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले 4 महीनो में लागातार रेपो दरो को बढ़ाया है। कई सारी रेटिंग एजेंसियों ने अपने अनुमान में दावा किया है कि, भारत में महंगाई दर अभी और बढ़ सकती है और आरबीआई महंगाई को काबू करने के लिए रेपो दरो में बढ़ोत्तरी कर सकता है, लेकिन इन सभी रेटिंग एजेंसियों के उलट एसबीआई इकोनॉमिक रिसर्च टीम का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में मौद्रिक नीति के बाद रेपो दरो में बढ़ोत्तरी को रोक देगा।
एसबीआई रिसर्च ने किया है दावा
एसबीआई इकोरैप ने अपने ताजा रिपोर्ट में इस बाता का अनुमान लगाय है। एसबीआई का मानना है कि 6.25 फीसदी दर अभी के लिए टर्मिनल रेट हो सकती है। बैंक का कहना है कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (NPC) 7 दिसंबर 2022 को रेपो दर को 35 आधार अंकों बढ़ाकर रेपो दर को 6.25 प्रतिशत कर देगी।
अर्थव्यस्था में हो रहा है सुधार
एसबीआई का यह दावा कई घरेलू और वैश्विक कारकों में सुधार से उपजा है। बैंक का कहना है कि दिसंबर 2022 के बाद मुद्रास्फीति धिरे धिरे कम होने लगेगी। एसबीआई ने कहा कि मार्च 2023 तक मुद्रास्फीति को लगभग 5.2 प्रतिशत के स्तर पर होने के लिए आंका गया है।

मुद्रास्फिति होगी कम
एसबीआई के मुताबिक सीपीआई मुद्रास्फीति (विशेष रूप से खाद्य सीपीआई ) बेमौसम बारिश के प्रभावित हुई थी। अब इसके रिकवर होने की संभावना है। बैंक का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से 7.2 प्रतिशत गिरने के बाद रुपया अब कमजोर स्थिति में नहीं है। एसबीआई के मुताबिक यूक्रेन युद्ध के बाद रुपये की सप्लाई चेन बेहद प्रभावित हुआ है। सप्लाई चेन प्रभावित होने की वजह से रुपए में गिरावट हुई थी

अगले साल स्थिति और बेहतर होगी
बैंक का कहना है कि हम उम्मीद करते हैं कि यदि बैंको में पैसा आता रहा और सॉफ्टवेयर निर्यात में देश अच्छा प्रदर्शन करता रहा तो देश की इकोनॉमिक स्थिति बेहतर हो जाएगी। RBI के डेटा के मुताबिक Q2 में सॉफ्टवेयर निर्यात बेहतर था। एसबीआई ने कहा है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति में कमी अमेरिकी फेडरल बैंक को अपनी दर-वृद्धि की गति को धीमा करने के लिए प्रेरित करेगी। एसबीआई का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यस्था अब मंदी के प्रभाव से ऊबर रही है।


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