नयी दिल्ली। अधिकांश शहरों में समय-समय पर लॉकडाउन के बावजूद 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में शहरी रोजगार दर 35.1 फीसदी तक बढ़ गई। इससे पहले अप्रैल में शहरी रोजगार में तब बड़ी गिरावट आई थी जब देश में कोरोना को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया था। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक कुल रोजगार दर (शहरी और ग्रामीण) जून में काफी तेजी से बढ़ी थी, मगर जुलाई में इसमें थोड़ी गिरावट आई। बावजूद इसके 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में ये फिर से 38.41 फीसदी पर पहुंच गई, जो 21 जून के 38.42 फीसदी के स्तर के बेहद करीब है।
किन सेक्टरों में बढ़ा रोजगार
सीएमआईई की रिपोर्ट के अनुसार काम पर वापस जाने वाले श्रमिकों में घरों में काम करने वाली महिलाएं, रसोइया, ड्राइवर, सफाईकर्मी और निर्माण श्रमिक शामिल हैं। समय समय पर लगने वाले लॉकडाउन के बावजूद कई प्रकार की सेवाएं कुछ प्रतिबंधों के साथ फिर से शुरू हो गई हैं। नतीजा यह है कि धीरे-धीरे रोजगार पटरी पर लौट रहा है। सीएमआईई के अनुसार जुलाई में रोजगार दर में रिकवरी जारी है। इस महीने के पहले तीन हफ्तों के दौरान औसत रोजगार दर 37.5 फीसदी थी, जो 2020 की पहली तिमाही में रही औससन 39.2 फीसदी से कम है।
1.8 करोड़ लोगों के पास काम नहीं
जुलाई के पहले तीन हफ्तों में 37.5 फीसदी और पहली तिमाही में 39.2 फीसदी के बीच के 175 बेसिस पॉइंट्स का मतलब है कि 1.8 करोड़ उन लोगों के पास रोजगार नहीं है जो कुछ महीने पहले तक काम कर रहे थे। सीएमआईई ने पहले कहा था कि अप्रैल में 12.2 करोड़ नौकरियों का नुकसान हुआ, जिसमें से देश में 1 जून को अनलॉक शुरू होने के बाद जून ही में 9.1 करोड़ नौकरियों की रिकवरी हुई।
श्रम भागीदारी भी बढ़ी
भारत में श्रम बाजार स्थिति पर सीएमआई की 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह के लिए पेश की गई साप्ताहिक रिपोर्ट बताती है कि श्रम भागीदारी बढ़ी है। जून के तीसरे सप्ताह में ये 42 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। इसके बाद तीन सप्ताह तक इसमें कमी आई। मगर 19 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में ये बढ़ कर फिर से 41.7 फीसदी पर पहुंच गई गई। हालाँकि इस दौरान बेरोज़गारी दर 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 7.9 फीसदी पर थी, जो इससे पिछले सप्ताह में 7.4 फीसदी रही थी।


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