नई दिल्ली, मार्च 31। पोस्ट ऑफिस स्कीमों के निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है। सरकार ने ऐसे निवेशकों को निराश नहीं किया और पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। बता दें कि वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लगातार नौवीं तिमाही में पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब 30 जून 2022 को होने वाली समाप्त तिमाही तक सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) और सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) जैसी छोटी बचत योजनाओं में निवेशकों उसी ब्याज दर पर रिटर्न मिलता रहेगा, जिस दर पर अभी मिल रहा था।
चेक करें ब्याज दरें
2022 की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में किए गए नए निवेश पर भी जनवरी-मार्च जितनी ही ब्याज दर ऑफर की जाएगी। इस बात की जानकारी वित्त मंत्रालय की तरफ से आज 31 मार्च 2022 को जारी किए गए एक सर्कुलर के माध्यम से कर दी गयी है। मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, पीपीएफ पर 7.10 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा। वहीं एनएससी पर 6.8 फीसदी और मासिक आय योजना खाते पर 6.6 फीसदी ब्याज दर बरकरार रहेगी।
पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं की ब्याज दरें :
- बचत खाता : 4 फीसदी
- 1 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
- 2 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
- 3 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 5.5 फीसदी
कुछ और योजनाओं की ब्याज दरें जानिए :
- 5 वर्षीय टाइम डिपॉजिट : 6.7 फीसदी
- 5 वर्षीय रेकरिंग डिपॉजिट : 5.8 फीसदी
- 5 वर्षीय सीनियर सिटीजेन सेविंग्स स्कीम : 7.4 फीसदी
- 5 वर्षीय मासिक आय खाता : 6.6 फीसदी
अन्य योजनाओं की ब्याज दरें :
- 5 वर्षीय नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट : 6.8 फीसदी
- पीपीएफ : 7.1 फीसदी
- किसान विकास पत्र : 6.9 फीसदी (124 महीनों में मैच्योर)
- सुकन्या समृद्धि योजना : 7.6 फीसदी
ईपीएफ पर घटी ब्याज दर
छोटी बचत दरों पर यथास्थिति बनाए रखने वाला सरकार का यह फैसला निश्चित आय वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। यह विशेष रूप से तब और भी बेहतर है जब एफडी दरें एक दशक के निचले स्तर पर हैं, और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की ब्याज दर 40 साल के निचले स्तर 8.1 प्रतिशत पर आ गई हैं।
आरबीआई की बैठक होगी
अब सभी की निगाहें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर हैं, जो 8 अप्रैल, 2022 को द्वि-मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने के लिए तैयार है। लोग यह देखने के लिए उत्सुक होंगे कि आरबीआई अब प्रमुख नीतिगत दरों के साथ क्या करेगा। 22 मई, 2020 को रेपो दर में अंतिम बार बदलाव किया गया था और उन्हें घटा कर 4% कर दिया गया था। तब से 20 महीने से अधिक समय हो गया है पर रेपो दर में कोई बदलाव नहीं हुआ। ये अप्रैल 2001 के बाद से सबसे कम दर है। आरबीआई के इतने लंबे समय तक दरों में कोई बदलाव नहीं होने के कारण, पिछले कुछ वर्षों से सावधि जमा (एफडी) की ब्याज दरों में लगातार कटौती करने वाले बैंकों ने अब धीरे-धीरे दरों में वृद्धि करना शुरू कर दिया है। ज्यादातर बड़े बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी की है।
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