नई दिल्ली, मई 3। फैक्ट्री गतिविधियों के मामले में एक अच्छी खबर आई है। दरअसल अप्रैल में फैक्ट्री गतिविधियों की ग्रोथ में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गयी। कोरोना संकट और कई राज्यों की तरफ से लगाए गए लॉकडाउन के बीच फैक्ट्री गतिविधियों में गिरावट नहीं आई, ये इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर है। आईएचएस मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रैल में 55.5 पर रहा, जबकि मार्च के महीने में इसकी रीडिंग 55.4 पर थी। बता दें कि पीएमआई इंडेक्स का 50 से अधिक होना ग्रोथ और इससे नीचे आ जाना गिरावट माना जाता है।

नए ऑर्डर और प्रोडक्शन
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक मासिक सर्वे के मुताबिक कोरोना संकट के कारण नए ऑर्डर की ग्रोथ रेट और प्रोडक्शन 8 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए। ये फैक्ट्री गतिविधियों में मामूली बढ़ोतरी के कारण रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 3,68,147 नए कोरोनोवायरस संक्रमण के मामले सामने आए। इनमें परसों से मामूली गिरावट देखी गई। कुल मामलों की संख्या 1,99,25,604 हो गयी है।
कीमतों में बढ़ोतरी
सर्वे में पता चला है कि जुलाई 2014 के बाद इनपुट लागत में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके नतीजे में सेलिंग प्राइस में वृद्धि हुई। मैन्युफैक्चरर्स के सामने भी कई चुनौतियां हैं। नौकरी के मोर्चे पर मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार गिरना जारी रहा। इसमें अप्रैल में मामूली गिरावट दर्ज की गयी।
नए ऑर्डर में तेजी
नए निर्यात ऑर्डर अप्रैल में लगातार आठवें महीने और अक्टूबर 2020 के बाद सबसे तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली। भारतीय वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में तेजी के चलते इसमें वृद्धि देखी गयी। इससे पहले मार्च महीने के लिए आए 8
कोर इंडस्ट्रीज ग्रोथ आउटपुट के डेटा के अनुसार इनके उत्पादन में 6.8 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गयी। जबकि फरवरी महीने में यह -3.8 फीसदी रही थी। मार्च 2020 में आठ कोर इंडस्ट्रीज के लिए ग्रोथ रेट -8.6 फीसदी रही थी। आठ कोर इंडस्ट्रीज में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद, फर्टिलाइजर, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।


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