Digital Gold: जहां एक तरफ सोना इस साल सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले एसेट क्लास में से एक बनकर उभरा है, वहीं मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, यानी SEBI ने एक बार फिर इन्वेस्टर्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बेचे जा रहे 'डिजिटल गोल्ड' में डील करने से सावधान किया है। रेगुलेटर के रुख और इन्वेस्टर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

डिजिटल गोल्ड, जो भारत के सबसे पुराने शौक का शानदार फिनटेक वर्जन है। नए जमाने के निवेशक के बीच बहुत पॉपुलर हो गया है। सिर्फ 100 रुपये में कोई भी ऐप से सोना खरीद सकता है, रियल टाइम में कीमतें ट्रैक कर सकता है, और बाद में इसे सिक्के या बार के रूप में रिडीम कर सकता है। पिछले हफ्ते रेगुलेटर ने इन्वेस्टर्स को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड प्रोडक्ट खरीदने के खिलाफ चेतावनी देते हुए एक पब्लिक नोटिस जारी किया था।
सेबी ने क्या कहा है?
सेबी के 8 नवंबर के बयान में कहा गया है कि उसने पाया है कि कुछ प्लेटफॉर्म 'डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड प्रोडक्ट्स' ऑफर कर रहे हैं, जिन्हें फिजिकल गोल्ड के विकल्प के तौर पर बेचा जा रहा है। इसको लेकर यह बताया जाता है कि ऐसे डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स सेबी के रेगुलेटेड गोल्ड प्रोडक्ट्स से अलग हैं क्योंकि उन्हें न तो सिक्योरिटीज के तौर पर नोटिफाई किया गया है और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव्स के तौर पर रेगुलेट किया गया है।
वे पूरी तरह से सेबी के दायरे से बाहर काम करते हैं। ऐसे डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स में इन्वेस्टर्स के लिए काफी जोखिम हो सकते हैं और इन्वेस्टर्स को काउंटरपार्टी और ऑपरेशनल जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। सेबी ने इन्वेस्टर्स को एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) जैसे रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स चुनने की सलाह दी है।
आसाना भाषा में SEBI की बात को समझे तो अगर कल कोई डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म बंद हो जाता है, तो आपका पैसा डूब सकता है, और आपको सेबी के इन्वेस्टर सेफ्टी फ्रेमवर्क के तहत कोई कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी। सीधे शब्दों में कहें तो ये ऐप्स रेगुलेटरी वैक्यूम में काम कर रहे हैं। अगर वे डिफॉल्ट करते हैं, रिडेम्पशन में देरी करते हैं, या आपके बिहाफ पर स्टोर किए गए फिजिकल गोल्ड को डिलीवर करने में फेल हो जाते हैं, तो सेबी आपकी मदद नहीं कर सकता।
SEBI डिजिटल गोल्ड को रिस्की क्यों कहता है?
डिजिटल गोल्ड इस तरह काम करता है- आप एक ऐप के जरिए थोड़ा सा सोना खरीदते हैं, मान लीजिए 500 रुपये का। कंपनी दावा करती है कि वह उतना ही सोना एक कस्टोडियन के पास वॉल्ट में रखती है। कुछ प्लेटफॉर्म तो आपको बाद में अपनी होल्डिंग को फिजिकल गोल्ड में बदलने की भी सुविधा देते हैं। समस्या यह है कि यह चेक करने, ऑडिट करने या गारंटी देने के लिए कोई एक जैसा नियम नहीं है कि सोना वॉल्ट में मौजूद है या नहीं। अगर प्लेटफॉर्म दिवालिया हो जाता है तो क्या होगा, इसके लिए भी कोई साफ कानूनी ढांचा नहीं है।
म्यूचुअल फंड या स्टॉकब्रोकर के उलट, जिन्हें SEBI के सख्त नियमों का पालन करना होता है, क्लाइंट के एसेट्स को अलग रखना होता है, और रेगुलर ऑडिट जमा करने होते हैं, डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म असल में खुद ही रेगुलेटेड होते हैं।
इसलिए SEBI का रेड फ्लैग मायने रखता है। वह यह नहीं कह रहा है कि सोना मत खरीदो। वह कह रहा है कि बिना रिस्क जाने अनरेगुलेटेड सोना मत खरीदो।
तो इसका ऑप्शन क्या है?
SEBI चाहता है कि निवेशक रेगुलेटेड गोल्ड प्रोडक्ट्स जैसे गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) में ही निवेश करें, जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं। गोल्ड ETF म्यूचुअल फंड स्कीम हैं जो फिजिकल गोल्ड में निवेश करती हैं। हर यूनिट एक खास मात्रा में सोने को दिखाती है, आमतौर पर एक ग्राम। सोना एक ऑथराइज्ड कस्टोडियन के पास रखा जाता है और रेगुलर ऑडिट किया जाता है। क्योंकि ETF स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं, निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के जरिए कभी भी यूनिट खरीद या बेच सकते हैं।
आप अभी भी सोने की कीमतों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होंगे, लेकिन आप SEBI के ट्रांसपेरेंसी और इन्वेस्टर-प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क से सुरक्षित रहेंगे।
एक्सपर्ट की राय
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स एंड इनसाइट्स के हेड ने ईटी को कहा कि जो भी लोग फिनटेक ऐप्स, वॉलेट या SEBI से रेगुलेटेड न होने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म्स के जरिए डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड खरीद रहे हैं या अपने पास रख रहे हैं, उन्हें इस ऑर्डर के बाद ध्यान देने की जरूरत है।
वहीं, सेन्को के CEO सुवंकर सेन का कहना है कि पिछले कुछ सालों में, डिजिटल गोल्ड को काफी पसंद किया गया है, खासकर युवा कस्टमर्स के बीच जो इसकी एक्सेसिबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी को पसंद करते हैं। उनका कहना है कि यह एडवाइजरी ऐसे इन्वेस्टमेंट्स को हतोत्साहित नहीं करती है, बल्कि इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा समझदार होने और ऐसे प्लेटफॉर्म चुनने की जरूरत पर जोर देती है जो भरोसेमंद, ट्रांसपेरेंट हों और जाने-माने ज्वैलर्स से समर्थित हों।
[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]
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