Why Gold Prices Are Falling: टॉप से Rs 12000/10 ग्राम गिर चुका सोने का भाव, ऐसा क्या हुआ? जानें बड़ी वजहें

Why Gold Prices Are Falling: अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती और डॉलर में गिरावट के बीच घरेलू बाज़ार में सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार (30 अक्टूबर) को गिरावट देखने को मिली। हालांकि अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोने के भाव में थोड़ी तेजी देखी गई और यह 0.6% बढ़कर 3,953.04 डॉलर प्रति औंस हो गया। दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी सोना वायदा 0.9% गिरकर 3,964.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

टॉप से 12000 रुपये नीचे आ चुका है सोना

घरेलू बाज़ार की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारत में प्रति 10 ग्राम भाव पर पड़ रहा है। कमोडिटी के बेंचमार्क बाज़ार पर नज़र रखने वाले कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) के ट्रेडिंग आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने सोने की कीमत में 1.62% की वृद्धि हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 43% अधिक है। ऐतिहासिक रूप से हाजिर सोना अक्टूबर 2025 में 4381.58 के सर्वकालिक उच्च स्तर (ऑल टाईम हाई) पर पहुच गया था।

Why Gold Prices Are Falling

हालांकि अब काफी गिरावट आ चुकी है। हाजिर सोना अपने ऑल टाईम हाई से 417 डॉलर प्रति औंस नीचे आ चुका है। घरेलू बाज़ार में सोने के भाव की बात करें तो अक्टूबर के मध्य में प्रति 10 ग्राम 1.32 लाख रुपये से ऊपर निकल गया था। वहीं आज यानी 30 अक्टूबर को प्रति 10 ग्राम के हिसाब से देखें तो देश में 24 कैरेट सोने का भाव 1,20,640 रुपये है जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,10,600 रुपये और 18 कैरेट सोने का भाव 90,520 रुपये है। ऐसे में देखा जाए तो सोना सर्वाकालिक उच्च स्तर से अब लगभग 12000 रुपये प्रति 10 ग्राम टूट चुका है।

क्यों गिर रहा है सोने का भाव?

HDFC Securities के अनुसार, इस साल सोने की कीमतों में पहले तेज़ी देखने को मिली थी और यह लगभग 50% से अधिक बढ़ गया था। हालांकि अब बड़े निवेशक मुनाफा निकाल रहे हैं, जिसके चलते बाजार में सोने पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा अमेरिका-चीन व्यापार तनाव जैसी वैश्विक चिंताओं में कमी आने के साथ सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के तौर पर सोने की मांग में कमी आ रही है और इसका असर घरेलू बाजार में भी दिख रहा है।

त्योहारी सीजन में पहले हुई जोरदार खरीदारी के बाद अब कुछ डिमांड में थोड़ी कमी आई है। इसके चलते भी भाव लगातार गिरता हुआ दिख रहा है।

इन सब प्रमुख कारणों के अलावा जब Federal Reserve या अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना दिखती हैं, तो सोने जैसे में निवेश की आकर्षकता कम होती है। वहीं, अमेरिका का डॉलर मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग घट सकती है।

जब वैश्विक आर्थिक-राजनीतिक माहौल कुछ बेहतर या शांत दिखने लगता है, तो निवेशक सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों से हटकर जोखिम भरे निवेशों की ओर लौटते हैं। इससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है। भारत और चीन जैसे कुछ बड़े उपभोक्ता देशों में सोने की मांग में गिरावट के चलते भी भाव में कमज़ोरी आ रही है।

एक्सपर्ट्स की मानें तो निवेशकों को जब यह लगने लगता है भविष्य में मांग बहुत अधिक नहीं बढ़ेगी या अन्य निवेश विकल्प बेहतर हैं, तो सोने की कीमतों पर दबाव बनने लगता है।

भारत में सोना बड़ी मात्रा में आयात होता है, इसलिए रुपये-डॉलर विनिमय दर का कमजोर होना सोने की स्थानीय कीमत को बढ़ा सकता है, लेकिन अगर डॉलर मजबूत हो और आयात महृंगा हो जाता है, तो अंततः कीमतों में एडजस्टमेंट हो सकता है।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]

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