सोना और चांदी में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसले के बाद जिस बड़ी गिरावट की आशंका थी, वैसी गिरावट देखने को नहीं मिली। पृथ्वी फिनमार्ट के मनोज कुमार जैन के मुताबिक, दोनों धातुओं में अभी तेजी का रुझान बना हुआ है, लेकिन फिलहाल दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। बाजार में आगे की दिशा तय करने में डॉलर, अमेरिकी बांड की ब्याज दर और कच्चे तेल की चाल अहम रहेगी।

मनोज कुमार जैन के मुताबिक, डॉलर और अमेरिकी बांड की ब्याज दरों में मजबूती सोना-चांदी के लिए दबाव की वजह है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे महंगाई बढ़ने की चिंता बढ़ती है और आगे केंद्रीय बैंक की नीतियां भी प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद का काफी असर पहले ही सोना-चांदी की कीमतों में आ चुका था। सोना करीब 4,700 डॉलर से गिरकर 4,300 डॉलर के आसपास आया, जबकि घरेलू बाजार में यह करीब 1.65 लाख रुपये से फिसलकर 1.50 लाख रुपये के आसपास पहुंचा। चांदी भी 2.50 लाख रुपये से ऊपर के स्तर से गिरकर करीब 2.30 लाख रुपये के आसपास आ चुकी है।
खरीदारी के लिए अहम लेवल-
घरेलू बाजार में सोने को लेकर मनोज कुमार जैन ने 1.50 लाख से 1.49 लाख रुपये के आसपास खरीदारी का स्तर बताया है। 1.45 लाख रुपये का स्तर अहम सहारा रहेगा, जबकि 1.54 लाख रुपये के आसपास अहम रुकावट है। वहीं चांदी में करीब 2.30 लाख रुपये के आसपास खरीदारी की राय है। 2.25 लाख रुपये के नीचे गिरावट बढ़ सकती है, जबकि 2.40 से 2.43 लाख रुपये के आसपास मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। बड़ी तस्वीर में चांदी का दायरा 2.30 से 2.50 लाख रुपये के बीच रह सकता है।
केंद्रीय बैंक की नीति सोने-चांदी के लिए महत्वपूर्ण-
जापान के केंद्रीय बैंक की नीति भी सोने-चांदी के लिए महत्वपूर्ण है। मनोज कुमार जैन के मुताबिक, जापान में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद काफी हद तक पहले ही कीमतों में शामिल है। अब बाजार की नजर केंद्रीय बैंक के संकेतों पर रहेगी। अगर येन मजबूत होता है और डॉलर कमजोर पड़ता है, तो सोने-चांदी को सहारा मिल सकता है।
औद्योगिक मांग से भी चांदी को समर्थन-
चांदी को औद्योगिक मांग से भी समर्थन मिल रहा है और तकनीकी क्षेत्र में इसका इस्तेमाल लगातार जारी है। हालांकि, तांबे में कमजोरी आने पर चांदी पर भी दबाव बन सकता है। तांबे को लेकर लंबी अवधि में तस्वीर सकारात्मक बताई गई है, लेकिन फिलहाल डॉलर की मजबूती और अमेरिकी शुल्क नीति से जुड़ी अनिश्चितता के कारण इसमें दायरे में कारोबार हो सकता है।
Gold-Silver में दायरे में कारोबार-
मनोज कुमार जैन के मुताबिक, सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग से सहारा मिल रहा है। ऐसे में आगे सोना-चांदी में बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय फिलहाल दायरे में कारोबार पर नजर रहेगी और डॉलर, बांड की ब्याज दर, कच्चे तेल तथा वैश्विक तनाव की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
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