Silver Rate Today: बीते कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा था। कभी अचानक तेजी और कभी तेज गिरावट ने आम ग्राहकों से लेकर बड़े निवेशकों तक को असमंजस में डाल दिया था। 23 फरवरी को एक बार फिर चांदी की कीमत में भारी उछाल देखने को मिल रहा है।

चांदी की कीमत में तेजी आने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता है। जब दुनिया में तनाव, युद्ध जैसे हालात या आर्थिक मंदी का डर बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश करते हैं। ऐसे समय में वे चांदी और सोने में पैसा लगाते हैं। इसके अलावा डॉलर में कमजोरी आने पर भी चांदी की मांग बढ़ जाती है। औद्योगिक उपयोग, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल सेक्टर में बढ़ती मांग भी दाम ऊपर ले जाती है। कम सप्लाई और ज्यादा खरीदारी की वजह से बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
आज भारत में चांदी के भाव में उछाल देखने को मिल रहा है। चांदी का भाव 161500 रुपये प्रति किलोग्राम है,
MCX पर चांदी का दाम
आज एमसीएक्स पर चांदी 264775 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। दोपहर 12:20 मिनट तक एमसीएक्स पर चांदी 11831 रुपए की तेजी के साथ कारोबार कर रही है।
ग्लोबल मार्केट में चांदी का कारोबार
इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कीमत सुबह 11:21 मिनट तक 86.61 डॉलर रही है। इसमें 2.02 डॉलर की तेजी देखने को मिल रहा है। यह 8.18 परसेंट के आस पास की तेजी है।
चांदी के भाव कैसे तय किए जाते हैं?
चांदी के भाव कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से तय होते हैं। यह केवल एक जगह से तय नहीं होते, बल्कि बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। सबसे पहले, अंतरराष्ट्रीय बाजार की भूमिका अहम होती है। लंदन और न्यूयॉर्क जैसे बड़े कमोडिटी बाजारों में चांदी की कीमत तय होती है। वहां जो रेट चलता है, उसका असर भारत सहित दूसरे देशों पर पड़ता है।
दूसरा बड़ा कारण है डॉलर की स्थिति। चांदी की ट्रेडिंग आमतौर पर अमेरिकी डॉलर में होती है। अगर डॉलर मजबूत होता है तो चांदी महंगी हो सकती है। वहीं डॉलर कमजोर होने पर कीमतों में बदलाव आता है।
तीसरा कारण मांग और सप्लाई है। चांदी का उपयोग गहनों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मेडिकल उपकरणों में भी होता है। जब इंडस्ट्री में मांग बढ़ती है, तो कीमत ऊपर जाती है। अगर खदानों से उत्पादन कम हो जाए तो भी भाव बढ़ सकते हैं।
भारत में घरेलू टैक्स, आयात शुल्क और रुपये की स्थिति भी चांदी के रेट को प्रभावित करती है। इसके अलावा वायदा बाजार (फ्यूचर ट्रेडिंग) में होने वाली खरीद-बिक्री भी कीमतों में उतार-चढ़ाव लाती है। इस तरह चांदी के भाव कई आर्थिक, वैश्विक और स्थानीय कारणों को मिलाकर तय होते हैं।


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