Gold Silver Price: चांदी में 56% की गिरावट, क्या अब खरीदारी का मौका? Ajay Kedia की Strategy

Gold Silver Price Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या यह गिरावट खरीदारी का मौका है या अभी कीमतों में और कमजोरी देखने को मिल सकती है? Commodity Expert Ajay Kedia के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नीति और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव फिलहाल कीमती धातुओं की चाल तय करने वाले अहम फैक्टर हैं। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिए से वह Gold और Silver को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं।

Gold Silver

GoodReturns के खास कार्यक्रम Commodity Catch में अजय केडिया ने सोने-चांदी की मौजूदा गिरावट, आगे के टारगेट, धनतेरस-दिवाली पर खरीदारी और अगले 12 महीनों के निवेश के अवसरों पर अपनी राय साझा की।

Gold Silver Price: क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के भाव?

अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी पर इस समय सबसे ज्यादा दबाव कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिका में महंगाई को लेकर बनी चिंता से पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 114-115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने की संभावना बढ़ती है। आमतौर पर ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने जैसी ऐसी संपत्तियों पर दबाव पड़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसके अलावा, निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितता भी कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह बन रही है।

हालांकि, केडिया का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और गोल्ड-सिल्वर में निवेश की मांग अब भी बनी हुई है। इसलिए मौजूदा गिरावट को केवल कमजोर मांग के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

Fed Rate Decision: दिसंबर में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति पर बाजार की नजर बनी हुई है। केडिया के मुताबिक, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, जबकि दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका भी बाजार की चिंता बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर फेड की ओर से 'Higher for Longer' यानी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने का संकेत मिलता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में 200-250 डॉलर तक की गिरावट संभव है।

इसके उलट, अगर महंगाई का दबाव कम होता है और फेड भविष्य में ब्याज दरों में कटौती या उन्हें स्थिर रखने का संकेत देता है, तो सोने में तेजी लौट सकती है।

Silver में 56% की गिरावट, क्या खरीदारी का मौका?

चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने इसे निवेशकों के लिए फिर से चर्चा में ला दिया है। केडिया के मुताबिक, चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 56 प्रतिशत तक टूट चुकी है। उन्होंने इस गिरावट को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर बताया, हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया। उनके अनुसार, चांदी की मजबूती के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, पिछले छह वर्षों से बाजार में सप्लाई की कमी बनी हुई है। दूसरा, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ रही है। Silver की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कई उद्योगों में भी होता है। यही वजह है कि आर्थिक सुस्ती की आशंका के बावजूद इसकी लंबी अवधि की मांग को लेकर उम्मीद बनी हुई है। Kedia के मुताबिक, चांदी में अगले 12 महीनों के दौरान 20-25 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना है। उन्होंने घरेलू बाजार में 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को भी संभावित लक्ष्य बताया। हालांकि, यह उनका बाजार अनुमान है, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

Gold Price Target: $5,400 तक जाएगा?

सोने को लेकर केडिया का नजरिया भी सकारात्मक है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत अगले 12 महीनों में 5,100-5,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है।

उन्होंने कहा कि सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता से समर्थन मिल सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और महंगाई का दबाव कम होता है, तो सोने की कीमतों को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।

हालांकि, निकट अवधि में 200-250 डॉलर तक की गिरावट की संभावना भी बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को तेजी की उम्मीद के साथ संभावित जोखिमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

Gold-Silver Ratio से समझें

सोने और चांदी के बीच निवेश का विकल्प चुनने के लिए केडिया ने Gold-Silver Ratio पर ध्यान देने की सलाह दी। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। उनके मुताबिक, मार्च-अप्रैल 2025 में यह अनुपात करीब 107 तक पहुंच गया था। उस समय सोने के मुकाबले चांदी अपेक्षाकृत सस्ती मानी जा रही थी। इसके बाद चांदी की कीमतों में तेज उछाल आया और फरवरी 2026 की शुरुआत में यह अनुपात करीब 44 तक आ गया। केडिया के अनुसार, फिलहाल यह अनुपात लगभग 75-75.5 के आसपास है। उनके मुताबिक, इससे चांदी में सोने के मुकाबले बेहतर अवसर दिखाई देता है। इसी वजह से अगले 12 महीनों के लिए उनकी पहली पसंद चांदी और दूसरी पसंद सोना है।

हालांकि, Gold-Silver Ratio अकेले निवेश का फैसला करने का आधार नहीं होना चाहिए। निवेशकों को कीमतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को भी ध्यान में रखना चाहिए।

Dhanteras और Diwali पर Gold-Silver खरीदना चाहिए?

त्योहारी और शादी के सीजन में सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में मौजूदा गिरावट खरीदारों के लिए राहत लेकर आई है। केडिया के मुताबिक, जिन लोगों को आभूषण खरीदने हैं, वे मौजूदा कीमतों पर खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन केवल कीमतों में गिरावट देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल घरेलू बाजार में चांदी के फ्यूचर भाव और फिजिकल बाजार की कीमतों के बीच करीब 28,000-30,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक का अंतर देखा गया था। फिजिकल बाजार में सप्लाई और प्रीमियम की स्थिति भी खरीदारी की लागत को प्रभावित कर सकती है।

खरीदारों को ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज, शुद्धता, हॉलमार्क और बिल जैसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, निवेश के लिए सोना या चांदी खरीदने वाले लोगों को यह तय करना चाहिए कि उन्हें फिजिकल मेटल चाहिए या बाजार से जुड़े वित्तीय उत्पादों के जरिए निवेश करना है।

Gold Jewellery, Digital Gold या ETF?

केडिया के मुताबिक, सोना खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि खरीदारी का उद्देश्य क्या है। अगर सोना पहनने या किसी पारिवारिक समारोह के लिए खरीदा जा रहा है, तो ज्वेलरी एक विकल्प हो सकती है। लेकिन अगर मकसद केवल निवेश करना है, तो दूसरे विकल्पों की लागत और जोखिम की तुलना करना जरूरी है। निवेश के लिए गोल्ड ETF और अन्य नियामकीय ढांचे के तहत आने वाले उत्पादों पर विचार किया जा सकता है। गोल्ड ETF में निवेश करने से फिजिकल सोने को रखने और उसकी सुरक्षा से जुड़ी कुछ परेशानियों से बचा जा सकता है, हालांकि इसमें बाजार जोखिम और अन्य शुल्क लागू हो सकते हैं। डिजिटल गोल्ड और SEBI-विनियमित निवेश उत्पादों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। निवेश से पहले संबंधित उत्पाद की नियामकीय स्थिति, लागत, निकासी की शर्तों और जोखिम को समझना जरूरी है।

Copper में भी निवेश का मौका?

सोने और चांदी के अलावा केडिया ने कॉपर को भी विविधीकरण के लिए एक विकल्प बताया। उनके मुताबिक, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में कॉपर की मांग लंबी अवधि में महत्वपूर्ण रह सकती है।

उन्होंने कॉपर में 1,350-1,360 के स्तर को अहम बताया और लंबी अवधि में 1,650-1,700 तक जाने की संभावना जताई। हालांकि, यह अनुमान संबंधित बाजार के भाव और यूनिट के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। निवेश से पहले मौजूदा कीमत और बाजार की स्थिति की पुष्टि जरूरी है।

Gold-Silver में आगे क्या करें निवेशक?

अजय केडिया के मुताबिक, सोने और चांदी में लंबी अवधि की संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन अगले कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह तक कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी फेड का रुख और मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। चांदी में उन्हें सोने के मुकाबले बेहतर संभावित रिटर्न दिखाई देता है, जबकि सोने को केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितता से समर्थन मिलने की उम्मीद है।

निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि एक्सपर्ट के बताए गए टारगेट अनुमान हैं, सुनिश्चित रिटर्न नहीं। किसी भी निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें। जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

[Disclaimer: यहां व्यक्त किए गए विचार और सुझाव केवल व्यक्तिगत विश्लेषकों या इंस्टीट्यूशंस के अपने हैं। ये विचार या सुझाव Goodreturns.in या ग्रेनियम इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (जिन्हें सामूहिक रूप से 'We' कहा जाता है) के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी, समर्थन या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं, न ही हम कोई निवेश सलाह प्रदान करते हैं या प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की खरीद या बिक्री का आग्रह करते हैं। सभी जानकारी केवल सूचनात्मक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए प्रदान की जाती है और कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले लाइसेंस प्राप्त वित्तीय सलाहकारों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित जरूर करें।]

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