Gold-Silver की कीमतों में इन दिनों जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों का ध्यान खींच लिया है। सिर्फ दो दिनों के भीतर ही गोल्ड में ₹5,000 से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सिल्वर में ₹20,000 से ज्यादा की तेज गिरावट देखने को मिली है। अगर ऑल टाइम हाई के स्तर से तुलना करें, तो सोना करीब ₹45,000 तक टूट चुका है और चांदी में लगभग ₹2 लाख के आसपास की गिरावट आ चुकी है।

इतनी बड़ी गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर यह संकेत क्या दे रहा है? क्या अभी भी गिरावट बाकी है या फिर यह खरीदारी का सही मौका बन सकता है? दरअसल, गोल्ड और सिल्वर की कीमतें कई बड़े ग्लोबल और आर्थिक फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। फिलहाल, सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का देखने को मिल रहा है।
डॉलर की मजबूती अहम फैक्टर-
फेड की ओर से ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या आगे बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया है। अगर आने वाले समय में दरों में और बढ़ोतरी होती है, तो गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती भी एक अहम फैक्टर है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना-चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव आता है।
चीन जैसे देश लगातार सोना खरीद रहें-
हालांकि दूसरी तरफ, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। हाल के महीनों में खासकर चीन जैसे देशों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी देखी गई है। अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो मांग बढ़ने से कीमतों में दोबारा तेजी आ सकती है, क्योंकि यह पूरी तरह डिमांड और सप्लाई के संतुलन पर निर्भर करता है।
कीमतों में और नरमी आ सकती है?
इसके साथ ही, महंगाई यानी इंफ्लेशन और वैश्विक तनाव भी अहम भूमिका निभाते हैं। अगर इंफ्लेशन कंट्रोल में रहता है और जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होता है, तो सोने की सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में मांग घट सकती है, जिससे कीमतों में और नरमी आ सकती है। कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट के पीछे कई फैक्टर्स काम कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें।
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