Gold Price Forecast: सोने की कीमतों में जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब गोल्ड की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ चुका है। इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Nomura ने सोने की कीमतों में और 11 फीसदी गिरावट की आशंका जताई है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो भारत में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 15,000 रुपये तक कम हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि क्या आने वाले दिनों में सोना और सस्ता होगा?

$3,500 प्रति औंस तक गिर सकता है सोना
ब्रोकरेज फर्म Nomura के ताजा रिसर्च नोट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत घटकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है। यह करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के मौजूदा स्तर से लगभग 11 फीसदी की गिरावट का संकेत देता है।
दरअसल, साल 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। जनवरी में गोल्ड 5,500 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद कीमतों में लगातार दबाव देखने को मिला। साल 2026 में अब तक सोने की कीमत 8 फीसदी से ज्यादा गिर चुकी है।
भारत में ₹15,290 तक सस्ता हो सकता है 10 ग्राम सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल भारत में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.39 लाख रुपये है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में Nomura का अनुमान सही साबित होता है और सोने की कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आती है, तो भारत में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 15,290 रुपये तक कम हो सकता है। इस हिसाब से 10 ग्राम सोने की कीमत घटकर करीब 1.23 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि, भारतीय बाजार में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय भाव पर निर्भर नहीं करती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, इंपोर्ट ड्यूटी और अन्य टैक्स भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करते हैं।
मुनाफावसूली से सोने पर बढ़ रहा दबाव
LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार में लगातार मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। लगातार बिकवाली के कारण गोल्ड अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है। हालांकि, कीमतों में गिरावट के बाद रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए बाजार में नई खरीदारी और ग्लोबल संकेतों का साथ मिलना जरूरी होगा। टेक्निकल नजरिए से सोने के लिए 1,42,000 रुपये का स्तर अहम रेजिस्टेंस है। अगर कीमतें इस स्तर के ऊपर टिकाऊ बढ़त हासिल करती हैं, तभी निकट अवधि में सोने का आउटलुक बेहतर हो सकता है।
अमेरिकी चुनाव और रोजगार के आंकड़ों पर रहेगी नजर
आने वाले दिनों में अमेरिकी मिडटर्म चुनाव और वहां से आने वाले आर्थिक आंकड़े सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार की नजर अमेरिकी चुनाव, बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी। इन आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं। अगर अमेरिका में आर्थिक आंकड़े मजबूत रहते हैं और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ती है, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, कमजोर आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने को सपोर्ट दे सकती है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव का भी दिख सकता है असर
Kotak Neo की AVP और कमोडिटी रिसर्चर कायनात चेनवाला के मुताबिक, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनावों से अमेरिका की एनर्जी पॉलिसी और ईरान को लेकर वॉशिंगटन के रुख के संकेत मिल सकते हैं। इसका असर ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता और सोने की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में तेजी आ सकती है। इसके उलट, तनाव कम होने और डॉलर मजबूत रहने की स्थिति में गोल्ड पर दबाव बना रह सकता है।
क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?
सोने की कीमतों में आई गिरावट के बाद खरीदारों के मन में यह सवाल है कि क्या अभी गोल्ड खरीदने का सही मौका है या कीमतों में और गिरावट का इंतजार करना चाहिए। Nomura का 3,500 डॉलर प्रति औंस का अनुमान बताता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अभी और गिरावट की गुंजाइश हो सकती है। हालांकि, यह एक ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है, न कि कीमतों में गिरावट की गारंटी। निवेशकों को सोने में निवेश का फैसला लेते समय अपनी निवेश अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी को ध्यान में रखना चाहिए। सिर्फ कीमतों में गिरावट देखकर जल्दबाजी में एकमुश्त निवेश करने से बचना बेहतर होगा।
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