शनिवार, 12 सितंबर को घरेलू बाजार में सोने के तेवर थोड़े नरम नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को एमसीएक्स (MCX) पर अक्टूबर वायदा में गिरावट दर्ज की गई, जो इंट्राडे के दौरान 1,50,695 रुपये तक गिर गया था। हालांकि, बंद होते-होते यह 1.51 लाख रुपये के स्तर को परखता दिख। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में रातभर में स्पॉट गोल्ड 4,313 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर बना रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.74 के स्तर पर बंद हुआ, जिससे भारत में सोने की आयात लागत ऊंची बनी हुई है।
मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के चलते सोने पर दबाव देखा गया। शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.15 के आसपास रहा, जबकि 10 साल की यील्ड पांच फीसदी के करीब पहुंच गई। इसके साथ ही कच्चे तेल में जारी उतार-चढ़ाव ने भी सोने की तेजी पर लगाम लगाई। चूंकि आज शनिवार को एमसीएक्स (MCX) बंद है, इसलिए सर्राफा कारोबारी आमतौर पर शुक्रवार के क्लोजिंग भाव और वैश्विक संकेतों के आधार पर सुबह की दरें तय करते हैं।

Gold price today: भारतीय खरीदारों के लिए 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने के नए संकेत
देश के बड़े ज्वैलर्स आमतौर पर 22 कैरेट (916) और 24 कैरेट (999) सोने के भाव IBJA के मानकों के हिसाब से तय करते हैं। ये दरें सुबह और शाम दो बार जारी की जाती हैं, जिन पर 5 फीसदी जीएसटी (GST) अलग से लगता है। मेकिंग या वैल्यू-एडिशन चार्ज डिजाइन और ब्रांड के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। इसीलिए खरीदारी करते समय सिर्फ 10 ग्राम की पूरी कीमत देखने के बजाय अलग-अलग दुकानों पर प्रति ग्राम के भाव की तुलना जरूर करें।
क्यों अलग-अलग शहरों में भिन्न होते हैं सोने के भाव?
हर शहर में सोने के दाम अलग होने की मुख्य वजह लॉजिस्टिक्स, स्थानीय टैक्स, बाजार की प्रतिस्पर्धा और हॉलमार्किंग का स्टॉक है। महंगे शोरूम और प्रीमियम ब्रांड्स ज्यादा मेकिंग चार्ज वसूलते हैं, जबकि छोटे बाजारों के व्यापारी बिक्री बढ़ाने के लिए कम मार्जिन पर काम करते हैं। इसके अलावा, बुलियन आयात करने वाले बड़े चेन स्टोर्स के लिए करेंसी हेजिंग भी मायने रखती है। यही कारण है कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों ही नहीं, बल्कि एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों के दामों में भी अंतर देखने को मिलता है।
22K vs 24K: इस वीकेंड सोने में समझदारी से करें चुनाव
रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले गहनों के लिए 22 कैरेट सोना ज्यादा मजबूत और टिकाऊ माना जाता है, जबकि सिक्के या लंबी अवधि के निवेश के लिए 24 कैरेट सही विकल्प है। जब भी सोना खरीदें, BIS हॉलमार्क और सत्यापन योग्य HUID कोड जरूर जांचें। आप BIS Care ऐप के जरिए इसे आसानी से स्कैन कर सकते हैं। खरीदारी के समय पक्का बिल लें और बायबैक नीतियों को अच्छे से समझ लें। वहीं, विशुद्ध निवेश के लिहाज से सरकारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) एक बेहतरीन विकल्प है, जहां सुरक्षा की चिंता किए बिना सोने के बढ़ते दामों का फायदा उठाया जा सकता है।
आगे किस दिशा में जाएंगे सोने के दाम?
सोने की अल्पकालिक चाल अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की स्थिरता पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो भारतीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है। इसके विपरीत, नीतिगत ब्याज दरों में राहत के किसी संकेत या रुपये में मजबूती से घरेलू दामों को सहारा मिलेगा। इसलिए गहने खरीदने या सोने में निवेश का फैसला लेने से पहले इन मैक्रो इकोनॉमिक संकेतों पर नजर जरूर रखें।


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