SBI Research Report On Gold: सोने के भाव में इस साल जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इस साल की शुरुआत से लेकर अब तक सोने की कीमत 50 फीसदी से अधिक चढ़े हैं। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड रेट $4,000 प्रति औंस के पार चली गई हैं। ऐसे में कई तरह के सवाल भी उठे हैं। हालांकि इस बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के इकॉनमिक रिसर्च डिपार्टमेंट की ओर से जारी एक रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।

इस रिपोर्ट में कई अहम बातें कही गई है जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भारत के लिए एक गोल्ड पॉलिसी को जरूरी बताया गया है। रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अब एक विस्तृत और लॉन्ग टर्म गोल्ड पॉलिसी (Gold Policy) की सख्त जरूरत है।
SBI रिसर्च की इस रिपोर्ट (Coming of (A Turbulent) Age: The Great Global Gold Rush) में सोने की बढ़ती कीमतों, घरेलू सप्लाई पर पड़ रहे दबाव और इसके इंपोर्ट पर निर्भरता जैसे मुद्दों का विस्तार से चर्चा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिज़र्व बैंक के गोल्ड होल्डिंग्स की वैल्यू तो बढ़ी है, लेकिन घरेलू मांग कमजोर हुई है। सप्लाई पर इंपोर्ट का दबदबा बना हुआ है। हालांकि, इससे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) पर सरकार का नुकसान भी बढ़ा है, जिससे पता चलता है कि रिकॉर्ड वैल्यूएशन के बावजूद बढ़ती कीमतों ने कैसे आर्थिक दबाव बनाया है।
भारत के लिए गोल्ड पॉलिसी क्यों है जरूरी?
बुधवार को जारी SBI रिसर्च रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड बाजार है। यहां पर सोने को सांस्कृतिक और निवेश दोनों ही रूपों में अहमियत दी जाती है। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि 2024 में भारत की कुल गोल्ड खपत 802.8 टन रही, जो ग्लोबल डिमांड का लगभग 26% हिस्सा है। वहीं, 815.4 टन खपत के साथ चीन पहले स्थान पर रहा। भारत की कुल सोने की जरूरत का करीब 86% हिस्सा इंपोर्ट के जरिए पूरा होता है जबकि डोमेस्टिक सप्लाई काफी सीमित है। यही कारण है कि भारत को एक ऐसी नीति बनानी चाहिए जो देश में गोल्ड के प्रोडक्शन, रीसाइक्लिंग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन को बढ़ावा दे सके।
RBI का बढ़ता गोल्ड रिजर्व
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI के पास अब तक करीब 880 टन सोना है, जो उसके कुल विदेशी भंडार का 15.2 फीसदी हिस्सा है। वित्त वर्ष 2024 में यह हिस्सा 9.1 फीसदी था। लगातार बढ़ती कीमतों के बीच गोल्ड स्टॉक्स में बढ़ोतरी ने भारत की स्थिति मजबूत की है। इसी के साथ गोल्ड ईटीएफ (Gold Exchange Traded Funds) में भी जोरदार निवेश देखा गया है। FY25 में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश 2.7 गुना और FY26 में 2.6 गुना बढ़ा है। सितंबर 2025 तक इनकी नेट एसेट वैल्यू 901.36 बिलियन रुपये तक पहुंच गई थी।
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोने को सिर्फ गहने या बचत के तौर पर नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट (Financial Asset) के रूप में देखने की जरूरत है। इसीलिए फ्यूचर गोल्ड पॉलिसी में सोने के रीसाइक्लिंग और गोल्ड मॉनेटाइजेशन (Gold Monetisation) को महत्व देनी चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि भारत को गोल्ड-बैक्ड पेंशन स्कीम (Gold-Backed Pension Scheme) जैसे उपायों पर भी विचार करना चाहिए।
भारत से आगे निकला चीन; बनाई नेशनल पॉलिसी
SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की सोने को लेकर एक नेशनल पॉलिसी है, जो इसके ट्रेडिंग, स्टोरेज, वैल्यूएशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सभी पहलुओं को शामिल करती है। वहीं भारत में अब तक गोल्ड पॉलिसी सिर्फ शॉर्ट टर्म कदमों तक सीमित रही है, जिनका मकसद लोगों को फिजिकल गोल्ड से दूर करना रहा। ऐसे में देखें तो चीन इस मामले में भारत से आगे निकल गया है।
Gold Price Prediction: आगे कैसी रहेगी सोने की कीमतों का रुझान
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतें आने वाले महीनों में भी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं और इनमें अस्थिरता (Volatility) भी बनी रहेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशक और फंड मैनेजर अब अपने पोर्टफोलियो का 10-20% हिस्सा गोल्ड में रखने की सिफारिश कर रहे हैं, जो पहले करीब 5% होता था। इससे गोल्ड की डिमांड कीमतों के ऊंचे स्तरों पर भी हाई बने रहने की संभावना बढ़ती है।
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि सोना अब सिर्फ एक कीमती मेटल नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा 'फियर गेजट (Fear Gauge) बन गया है जो ग्लोबल लेवल पर आर्थिक अस्थिरता का संकेत देता है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत अब भी ठोस गोल्ड पॉलिसी नहीं लाता, तो यह उसकी मॉनेटरी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी दोनों के लिए चुनौती साबित हो सकता है।
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