Gold Rule Change: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रीक समीक्षा कमिटी यानी MPC की मीटिंग आज शुक्रवार को खत्म हुई. हर दो महीने में होने वाली मीटिंग में ब्याज दरों, आर्थिक स्थिति, महंगाई समेत अन्य पर मंथन होता है. जून पॉलिसी में MPC ने ब्याज दरों को घटाने का ऐलान किया, जिसमें नीतिगत दरों को 50 बेसिस पॉइंट्स घटाया गया है. ब्याज दरों में लगातार तीसरी बार कटौती की गई है. कैश रिजर्व रेश्यो यानी CRR को भी 4% से घटाकर 3% कर दिया है. इसके अलावा गोल्ड लोन को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है.
रिजर्व बैंक ने छोटे कर्जदारों को राहत देने के मकसद से गोल्ड लोन नियमों में ढील दी है. इसके तहत सेंट्रल बैंक ने 2.5 लाख रुपए तक के गोल्ड लोन के लिए लोन टू वैल्यू (LTV) रेश्यो को 75% से बढ़ाकर 85% कर दिया है, जिसमें ब्याज कंपोनेंट भी शामिल है.
गोल्ड लोन नियमों में ढील
रिजर्व बैंक की ओर से गोल्ड लोन के नियमों में हुए बदलाव को उदाहरण से समझिए. इसके तहत अगर कोई उधारकर्ता 1 लाख रुपए की वैल्यू का सोना गिरवी रखता है, तो वे अब 85,000 से 100000 रुपए तक का लोन हासिल कर सकता है, जो पहले की तुलना में ज्यादा है. इससे घरों और छोटे कारोबार के लिए लोन तक आसान पहुंच मिलने की उम्मीद है.

यह राहत रिजर्व बैंक की ओर से गोल्ड लोन ट्रेडिशन की व्यापक समीक्षा का हिस्सा है. खास तौर से गैर-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) की ओर से दी जाने वाली कर्ज की समीक्षा का एक पार्ट है.
इसी साल अप्रैल में सेंट्रल बैंक ने एक संयुक्त पर्यवेक्षी समीक्षा के दौरान कई मुद्दों जैसे कि बहुत ज्यादा LTV उल्लंघन, तीसरे पक्ष के एजेंटों का अत्यधिक उपयोग, बिडिंग प्रॉसेस में अनियमितताएं और कमजोर जोखिम रिस्क कंट्रोल सिस्टम को शॉर्ट लिस्ट किया था. इसके जवाब में मसौदा दिशानिर्देशों ने एक सख्त ढांचे का प्रस्ताव किया.
- LTV को 75% पर सीमित करना (ब्याज शामिल)
- बुलेट रीपेमेंट टेन्योर को 12 महीनों तक सीमित करना
- सख्त इंटरनल कंट्रोल और कंप्लायंस सिस्मट
- प्राइमरी सेक्टर लोन (PSL) कैटेगरी के तहत गोल्ड लोन के अंतिम उपयोग की निगरानी
- छोटे कर्जदारों के लिए राहत
छोटे टिकट वाले गोल्ड लोन
छोटे उधारकर्ताओं के लिए चीजों को आसान बनाने के लिए रिजर्व ने अब स्पष्ट किया है कि छोटे टिकट वाले गोल्ड लोन के लिए क्रेडिट एनलिसिस की जरूरत नहीं होगी.


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