नई दिल्ली, सितंबर 02। निवेश के नजरिए से साल 2022 अब तक बहुत अच्छा नहीं रहा है। महंगाई, ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी और स्टॉक मार्केट में निरंतर उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को निराश किया है। स्टॉक मार्केट के उतार-चढ़ाव के बीच सोना हमेशा सुरक्षित निवेश का बेहतरिन विकल्प माना जाता है। लेकिन, इस बार दूसरे अन्य निवेश एसेट्स की तरह ही गोल्ड की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिला है। परिस्थिती को देखते हुए सवाल यह है कि क्या इनवेस्टर्स को सोने में निवेश को होल्ड करना चाहिए या इसे बेच देना चाहिए?।
दो बार सोने में दिखी थी बेहतर उछाल
बीते एक-दो सालों में सोने में निवेश के केवल दो बार सुरक्षित विकल्प साबित हुआ है। साल 2020 के मार्च से अगस्त के समय अवधि में सोने की कीमत 1,471 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 2,063 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची थी। यह कोरोना माहामारी के वजह से लॉकडाउन का समय था। दूसरी बार सोने की कीमत में उछाल इस साल फरवरी-मार्च के दौरान आया था। इस बार इसकी कीमत 1,797 डॉलर प्रति औंस से 2,050 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। यूक्रेन और रसिया के युद्ध की वजह से यह स्थिती बनी थी।
हर बुरी घटना का होता है असर
सोने की कीमते हर अंतराष्ट्रिय घटनाओं पर निर्भर करती है। और खराब खबरों का असर सोने की कीमत पर तुरंत देखने को मिलता है। यूक्रेन और रूस के युद्ध के शुरूआती दिनों में जब दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कहा था कि इनफ्लेशन कुछ समय तक हाई बना रहेगा, तब सोने की कीमतों में उझाल आना चाहिए था लेकिन सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
सोने के दामों में आई है गिरावट
8 मार्च 2022 को सोने की कीमत 2,050 डॉलर प्रति औंस थी जो अब गिरकर 1,697 डॉलर प्रति औंस हो गई है। डॉलर में सोने की कीमत में इस समया 14 फीसदी से ज्यादा गिरावट आ चुकी है। दामों गिरावट की वजह अमेरिका में बढ़ता ब्याज दर है। अमेरिकी का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू कनरे के लिए ब्याज दरों को बढ़ा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढाने की वजह से अमेरिका में पैसा वापस आना शुरू हो गया है, इससे डॉलर में मजबूती आएगी। मजबूत डॉलर सोने के किमतो के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
इनवेस्टर्स को इधर-उधर के बातो पर ध्यान नहीं देना चाहिए। निवेशकों को अपने फाइनेंशियल गोल पर फोकस करना चाहिए। यह बताना किसी भी एक्सपर्ट्स के लिए मुश्किल है कि ग्लोबल इकोनॉमी को कोविड-19 के खराब प्रभा से उबरने में कितना समय लग जाएगा। अगर सरकारें इनफ्लेशन पर काबू करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ती हैं तो इसका असर डिमांड पर पड़ेगा। डिमांड में गिरावट का असर कीमतो पर जरूर पड़ेगा।
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