Gold and Silver rate: बीते हफ्ते सोने और चांदी का रेट एकदम से कम हो गया। इस दौरान सोने और चांदी के दाम में भारी गिरावट दर्ज हुई। जानकारों का मानना है कि डॉलर के कमजोर पड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी का रेट कम होने का असर भारत के सराफा बाजार में भी देखा जा रहा है।
जहां तक सोने के रेट की बात है तो बीते हफ्ते 24 कैरेट सोने का रेट शुक्रवार को 62540 रुपये प्रति 10 ग्राम रुपये के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं सोने का यह रेट सोमवार को 63352 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। इस प्रकार से पूरे हफ्ते के दौरान गोल्ड का रेट 812 रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के साथ बंद हुआ है।

वहीं चांदी का हाल भी बीते हफ्ते अच्छा नहीं रहा। चांदी का रेट तो सोने से काफी ज्यादा कम हुआ। बीते हफ्ते शुक्रवार का चांदी का रेट 71550 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं चांदी का रेट सोमवार को 73705 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बंद हुआ था। इस प्रकार से पूरे हफ्ते के दौरान चांदी का रेट 2155 रुपये प्रति किलो की गिरावट के साथ बंद हुआ।
जानिए सोने और चांदी का ऑल टाइम हाई रेट
सोना अभी अपने ऑलटाइम हाई से करीब 912 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता बिक रहा है। सोने ने अपना ऑलटाइम हाई 28 दिसंबर 2023 में बनाया था। उस दिन सोना 63452 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर था। वहीं चांदी अभी भी अपने ऑलटाइम हाई से 5384 रुपये नीचे ट्रेड कर रही है। चांदी ने अपना ऑलटाइल हाई 76934 रुपये का 30 नवंबर 2023 को बनाया था।
2024 में कहां तक जा सकता है सोने का रेट
कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन के अनुसार निवेश के लिहाज से गोल्ड काफी आकर्षक बना हुआ है। इन्होंने उम्मीद जताई है कि 2024 में इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड 2,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाएगा। ऐसे में भारत में यह 70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा सकता है।
वहीं ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन संयम मेहरा ने कहा है कि गोल्ड की कीमतों में शादी सीजन में तेजी देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें घटाने और भूराजनीतिक तनाव जारी रहने, कमजोर रुपये से सोने को समर्थन मिलेगा। इससे भारत में गोल्ड 68,000 रुपये से लेकर 70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का स्तर दिखा सकता है।
2023 में सोने ने कितना दिया है रिटर्न
जानकारों के मुताबिक, ग्लोबल आर्थिक मंदी की वजह से अमेरिका की ब्याज दरों में ठहराव, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और इंफ्लेशन रेट की वजह से साल 2023 में भी गोल्ड ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। 2023 में गोल्ड ने करीब 13 से 16 फीसदी का रिटर्न दिया है।
जानिए सोने में निवेश के फायदे
मुद्रास्फीति से बचाव: जब मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) बढ़ती है, तो करेंसी का दाम घट जाता है। लॉन्ग टर्म में, दुनिया की लगभग सभी प्रमुख मुद्राओं का मूल्य सोने की तुलना में कम हो गया है। यही कारण है कि लोग पैसा सोने के रूप में रखते हैं।
सोने पर ले सकते हैं कर्ज: रियल एस्टेट जैसी अन्य फिजिकल एसेट्स की तुलना में सोने में निवेश को बहुत जल्द बेचा जा सकता है। फिजिकल गोल्ड के मामले में रेडिम्पशम अमाउंट (सोना बेचने पर मिलने वाली राशि) सोने की शुद्धता पर निर्भर करेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर सोने गिरवी रख कर कर्ज भी लिया जा सकता है।
सोना महसूस किया जा सकता है: सोना उन कुछ एसेट में से एक है जो मूर्त (टेंजिबल) है और यही कारण है कि यह निवेशकों के बीच सुरक्षा की धारणा पैदा करता है। रियल एस्टेट जैसी अन्य टेंजिबल एसेट खरीदने की तुलना में सोना खरीदना आसान है।
भू-राजनीतिक कारक: भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान सोना आमतौर पर अच्छा प्रदर्शन करता है। युद्ध जैसे संकट, जिसका अधिकांश एसेट क्लास की कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, लेकिन यह सोने की कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। क्योंकि सोने की मांग 'सुरक्षित' निवेश के रूप में बढ़ जाती है।


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