Go First Airlines News: आपको बताते चलें कि एक बैठक में दिवालिया हो चुकी एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट को लेकर कुछ बड़े फैसला किया जाने की बात जा रही थी। आपको बताते चलें कि इसमें लेंडर्स के द्वारा लिक्विडेशन यानी संपत्ति की बिक्री के प्रपोजल पर भी विचार किया गया है। इसके साथ ही एक और प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, जिसमें इस दिवालिया हो चुकी एयरलाइन कंपनी के एसेट्स के इच्छुक खरीदारों पर चर्चा होने की बात कही गई थी। मीडिया में मौजूद रिपोर्ट के अनुसार इस एयरलाइन कंपनी के क्रेडिटर्स की कमेटी के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट दाखिल करने की डेडलाइन को बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाने की बात कही गई।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की गो फर्स्ट की क्रेडिटर्स कमेटी के द्वारा एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट की डेडलाइन को बढ़ाने के प्रपोजल पर वोटिंग होनी थी। आपको बताते चलें कि इस पर चर्चा इसलिए भी जरूरी हो गई है, क्योंकि स्पाइसजेट के अलावा तीन और रेजोल्यूशन प्रपोजल दाखिल किए जा चुके हैं। आपको बताते चलें कि इससे पहले 22 नवंबर की थी, जिसे बढ़ाया गया। इसके बाद दिसंबर के महीने में स्काई वन, स्पाइसजेट और सैफरिक इन्वेस्टमेंट्स ने दिवालिया हो चुकी एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट को खरीदने में इंटरेस्ट दिखाया था।

बताते चलें कि गो फर्स्ट को साल 2023 में बैंकरप्ट घोषित किया गया है। पिछले साल में महीने में इस कंपनी मे बैंकरप्सी के लिए अप्लाई किया था। आपको बताते चलें कि गो फर्स्ट एयरलाइन कंपनी को साल 2005 में बनाया गया था।
सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के अलावा कई और भी ऐसे बैंक है, जिनका करोड़ों रुपए का एक्सपोजर गो फर्स्ट एयरलाइन में शामिल है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इनमें आईडीबीआई बैंक का 58 करोड रुपए और बैंक ऑफ बड़ौदा का 1430 करोड़ रुपए का एक्सपोजर है। वहीं दायचे बैंक का 1320 करोड़ रुपए का एक्सपोजर है।
बैंकों के अलावा ऑनलाइन कंपनी पर कई और लोगों के उदाहरण जिम विमान पत्तेदारों के करीब 2000 करोड रुपए बकाया हैं। इसके अलावा वेंडर्स का 1000 करोड़ रुपए, ट्रैवल एजेंट के 600 करोड़ रुपए और 500 करोड़ रुपए का रिफंड की उधारी भी इस कंपनी पर है।
मिल रही जानकारी के मुताबिक इस कंपनी पर अब 6521 करोड़ रुपए से अधिक का आउटस्टैंडिंग कर्ज है। इस कर्ज में सरकारी बैंक का भी बड़ा हिस्सा शामिल है। मीडिया में मौजूद जानकारी के हिसाब से इसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सबसे ज्यादा 1987 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं।
आपको बताते चलें कि इसके अलावा गो फर्स्ट एयरलाइन ने कोरोना महामारी के दौरान सेंट्रल गवर्नमेंट के द्वारा शुरू की गई इमरजेंसी क्रेडिट स्कीम के तहत 1292 करोड रुपए का लोन भी लिया है।
अगर आप इन सभी उधार को कैलकुलेट करके एक अमाउंट बनाते हैं, तो करीब 11000 करोड़ रुपए का बकाया इस कंपनी पर है।
आपको बताते चलें कि गो फर्स्ट एयरलाइन के एसेट्स बेचकर यह सभी बकाया चुकाने की बात की जा रही है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या वाकई कंपनी के पास इतने एसेट्स हैं कि वह इन्हें बेचकर अपने पूरे सभी उधार चुकता कर पाएंगी।
मीडिया में मौजूद जानकारी के मुताबिक कंपनी के पास 3000 करोड़ रुपए की कीमत वाली जमीन है। ये जमीन महाराष्ट्र में मौजूद है। इसके अलावा महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इसकी एक एयरबस ट्रेंनिंग फेसिलिटी और कंपनी का हेडक्वार्टर भी है।
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