Study on LPG Cylinder: ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं। इसके लिए वह गोबर, कोयले और लकड़ी का भी इस्तेमाल करते हैं। एक नए स्टडी के अनुसार, अगर ग्रामीण परिवार LPG पर स्विच करते हैं तो इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इनडोर और आउटडोर दोनों प्रदूषण में कमी आएगी जिस कारण हर साल 1,50,000 से ज्यादा लोगों की जान बचेगी।

इस स्टडी में हुआ खुलासा
ग्लोबल पब्लिक हेल्थ ऑर्गनाइजेशन, वाइटल स्ट्रैटेजीज की स्टडी में ये जानकारी दी गई है कि ग्रामीण परिवार LPG पर स्विच करते हैं तो इस बदलाव से जनसंख्या में लगभग 37 लाख "हेल्दी ईयर्स" भी जुड़ेंगे। इनमें से आधे से ज्यादा लोग 4 राज्यों के लोगों को मिलेगा। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में लोगों को फायदा मिलेगा। इन राज्यों में सबसे ज्यादा आबादी और सबसे कम एलपीजी उपयोग और वायु प्रदूषण है।
स्टडी में बताया गया LPG पर स्विच करने के फायदे
इस स्टडी में बताया गया है किज्यादातर स्वास्थ्य फायदों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में जन्म के समय कम वजन के कारण शिशु मृत्यु दर में कमी आना और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज में सुधार होना शामिल है और यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) को सपोर्ट करती है जो गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सब्सिडी वाली गैस प्रदान करने वाली सरकारी योजना है। इस योजना के तहत, 5 करोड़ एलपीजी कनेक्शन तीन साल की अवधि में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को दिया गया।
इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने देखा कि पार्शियल और फुल एलपीजी सब्सिडी लगभग 90 मिलियन गरीब परिवारों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करेगी, जिनके पास वर्तमान में या तो खाना पकाने की गैस तक कोई पहुंच नहीं है या पीएमयूवाई के तहत पार्शियल पहुंच है। यदि ऐसे परिवार विशेष रूप से एलपीजी पर स्विच करते हैं, तो प्रदूषक पीएम 2.5 के लिए औसत घरेलू जोखिम नाटकीय रूप से कम हो जाएगा, अध्ययन का अनुमान है कि ये 180 ug/m3 से 48 ug/m3 तक कम होगा।
PM2.5 रिस्क कम होने से सिर्फ LPG पर स्विच करने वाले परिवार ही नहीं बल्कि आसपास के परिवेश में रहने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि "चूल्हे" का धुआं परिवेशी वायु प्रदूषण में योगदान देता है। अध्ययन में 1,100 रुपये प्रति सिलेंडर की कीमत मानते हुए आठ सिलेंडरों के लिए एक घर के लिए फुल सब्सिडी की वार्षिक लागत 8,800 रुपये होने का अनुमान लगाया गया है और आधी सब्सिडी का मतलब 600 रुपये प्रति सिलेंडर की दर से एक साल में प्रति घर 4,800 रुपये खर्च करना होगा।


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