एशिया में एक नया सैन्य तनाव उभरकर सामने आया है, जहां थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। यह विवाद दोनों देशों की सीमा पर स्थित पुराने मंदिरों के दावे को लेकर है। 24 जुलाई को हालात तब और बिगड़ गए जब थाईलैंड ने कंबोडियाई सेना की गतिविधियों के जवाब में अपने F-16 लड़ाकू विमान तैनात कर दिए।

क्या है विवाद की जड़?
यह विवाद मुख्य रूप से ता मुएन और ता मोआन थोम नाम के दो मंदिरों को लेकर है, जिन पर दोनों देशों का दावा है। 24 जुलाई को थाईलैंड के सुरिन प्रांत में फानोम डोंग राक जिले के पास गोलीबारी की घटना हुई, जिसमें कंबोडियाई सेना ने थाई सेना के एक बेस के करीब फायरिंग की। थाई सेना के मुताबिक, कंबोडिया ने BM-21 रॉकेट का इस्तेमाल किया, जिससे एक समुदायिक क्षेत्र में तीन आम नागरिकों की मौत हो गई।
थाईलैंड का जवाब और राजनयिक कदम
घटना के बाद थाईलैंड ने अपने छह F-16 जेट विमानों से जवाबी हवाई हमला किया। साथ ही थाई सरकार ने कंबोडिया के साथ सभी सीमा चौकियों को बंद करने के निर्देश दिए और अपने नागरिकों को कंबोडिया छोड़ने की सलाह दी। राजनयिक स्तर पर भी दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को देश छोड़ने को कहा है, जिससे संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं।
सेना की प्रतिक्रियाएं
थाई सेना ने कंबोडियाई सेना की इन कार्रवाइयों को 'अमानवीय' बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। वहीं, कंबोडिया के सैन्य अधिकारियों ने कहा कि वे अपने क्षेत्रीय अधिकारों की हर कीमत पर रक्षा करेंगे और थाईलैंड के आरोपों को बेबुनियाद बताया।
भारत के लिए क्या है असर?
भारत दोनों देशों के साथ पुराने और अच्छे संबंध रखता है। कंबोडिया में करीब 5,000 भारतीय रहते हैं, जो शिक्षा, मेडिकल, फार्मा और कृषि जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इससे भारत-कंबोडिया और भारत-थाईलैंड के बीच व्यापार, टूरिज्म, एविएशन और आयात-निर्यात पर असर पड़ सकता है।
भारत-थाईलैंड संबंध मजबूत
अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थाईलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, तकनीक और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत किया था। हालांकि मौजूदा स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक रूप से एक नई चुनौती पैदा कर सकती है।
बाजार पर दिखा असर
इस तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा। डिफेंस स्टॉक्स जैसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचएएल और कोचीन शिपयार्ड में गिरावट आई जबकि कुछ कंपनियों जैसे मझगांव डॉक और पारस डिफेंस ने बढ़त दर्ज की।
नज़र बनाए रखें
अंतरराष्ट्रीय संकट अक्सर शेयर बाजार और विदेश नीति दोनों पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। इस घटना पर भारत की कूटनीतिक रणनीति और एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव होते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है. गुडरिटर्न्स की ओर से निवेश की सलाह नहीं है. यह ब्रोकरेज की ओर से सलाह दी गई है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर परामर्श करें.)
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