Gensol Engineering Stock Price: जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड के फाउंडर्स अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने कंपनी में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। अनमोल सिंह जग्गी कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर थे और पुनीत जग्गी कंपनी में पूर्णकालिक डायरेक्टर(whole time director) के पद पर थे। ये दोनों ही अब कंपनी में किसी भी कमिटी के सदस्य भी नहीं रहेंगे। सोमवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अंतिरम आदेश का अनुपालन का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है। कंपनी के स्टॉक्स पर इसका असर देखने को मिल रहा है।

कंपनी के शेयर्स पर दिख रहा है असर (Gensol Engineering Share Price)
आज मंगलवार को जेनसोल इंजीनियरिंग के शेयर्स बीएसई पर लुढ़क गए हैं। कंपनी के शेयर्स 4.99% तक फिसलकर 51.84 रुपये के भाव पर आ गए हैं। हालांकि, सोमवार को 54.56 रुपये के शेयर प्राइस पर क्लोज हुए थे। 1 हफ्ते में कंपनी के शेयर प्राइस में 22.59% की गिरावट दर्ज की गई है। इस साल अब तक 3 महीने के अंदर ही यह शेयर 91.39% तक टूट गया है।
अनमोल सिंह जग्गी ने दी ये जानकारी (Gensol Engineering Share News)
अनमोल सिंह जग्गी ने बोर्ड को संबोधित अपने रिसाइन पेपर में लिखा कि वह 12 मई, 2025 को कारोबारी घंटों की समाप्ति से जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड के मैनेजिंग डॉयरेक्टर के पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने घोषणा कि वह 15 अप्रैल, 2025 के सेबी अंतरिम आदेश के तहत दिए गए निर्देश के कारण इस्तीफा दे रहे हैं।
जानें क्या है मामला
जेनसोल ने पावर फाइनेंस कॉर्प और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) से 977 करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्म लोन लिया था और केवल 4,707 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे थे। SEBI के अनुसार, एक सालकी अवधि में 262 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हिसाब नहीं मिला।
SEBI ने कहा कि जेनसोल से गो ऑटो को EV खरीद के लिए पैसे को ट्रांसफर किया गया, लेकिन बाद में इसे वापस या जग्गी बंधुओं से जुड़ी अन्य संस्थाओं को डायवर्ट कर दिया गया और उन्होंने इसका इस्तेमाल अपनी निजी खर्चों में किया।
SEBI ने बताया कि, IREDA लोन से 93.88 करोड़ रुपये गो ऑटो को ट्रांसफर किए गए और 50 करोड़ रुपये कैपब्रिज वेंचर्स को ट्रांसफर किए गए और बाद में DLF कैमेलियास में एक लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा गया जिसकी कीमत 42 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। कंपनी के प्रमोटर्स पर आरोप है कि उन्होंने पैसों को छुपाने और इधर-उधर करने के लिए कई शेल कंपनियों का सहारा लिया। कुछ विदेशी कंपनियों में भी इन पैसों का निवेश किया गया है, जिनमें दुबई और अमेरिका की फर्में शामिल हैं।


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