Gen Z financial crisis: जेनरेशन Z यानी वे युवा जो लगभग 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं। लेकिन इनकी शुरुआत आर्थिक रूप से आसान नहीं है। Bank of America (BofA) की एक रिपोर्ट और मिशिगन विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार, Gen Z को मौजूदा समय में कई गंभीर फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना करना पड़ रहा है। उनका खर्च उनकी बचत से कहीं ज्यादा है, जिससे उनका भविष्य खतरे में दिख रहा है।

Gen Z ट्रेंड्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंस से आसानी से प्रभावित होती है। महंगे गैजेट्स, ब्रांडेड कपड़े और बाहर खाने-घूमने पर ज्यादा खर्च करते है।
Better Money Habits स्टडी (2025) के मुताबिक, 18-28 साल के 72 प्रतिशत युवा अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कदम उठा रहे हैं। लेकिन मुश्किलें कम नहीं हैं। कर्ज का स्तर ऊंचा है, महंगाई बढ़ रही है, और रोजमर्रा की जिंदगी पहले से ज्यादा महंगी हो गई है। अधिकतर युवाओं का कहना है कि उनके मासिक खर्च अनुमान से काफी ज्यादा होते हैं ।
जनरेशन Z के खर्चों की तस्वीर: कहां जाता है इनका पैसा?
आज की युवा पीढ़ी, जिसे हम जनरेशन Z के नाम से जानते हैं अपनी जीवनशैली और खर्च करने के तरीके को लेकर पहले की पीढ़ियों से काफी अलग है। Bank of America (BofA) रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z के युवाओं के खर्चों का बड़ा हिस्सा कुछ मुख्य जरूरतों पर केंद्रित है। जैसे- किराने का सामान,किराया और बिजली-पानी और बाहर खाना-पीना।
51% युवाओं का मानना है कि महंगाई उनकी आर्थिक सफलता में बड़ी रुकावट है।
बढ़ती महंगाई के बीच लोगों की बचत की कोशिशें
महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन की लागत ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है। ऐसे समय में लोग अपने खर्चों पर काबू पाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में सामने आए एक सर्वे के अनुसार, कई लोगों ने अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
सर्वे के मुताबिक- 64% लोगों ने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की है, ताकि वे केवल आवश्यक चीजों पर ही पैसा खर्च करें। वहीं, 41% लोगों ने बाहर खाना कम कर दिया है, जिससे उन्हें मासिक बजट में काफी राहत मिली है। जबकि 23% लोगों ने सस्ते किराने के विकल्प अपनाए हैं, ताकि वे जरूरी सामान कम कीमत में खरीद सकें।
ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि लोग अपने खर्च करने की आदतों में बदलाव ला रहे हैं और जरूरत के हिसाब से प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की सोच और आदतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो न केवल व्यक्तिगत बचत बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक अस्थिरता से निपटने में भी मदद मिलेगी।
युवाओं के डेटिंग खर्चों में आई कमी
Bank of America (BofA) की रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ती महंगाई और बदलती प्राथमिकताओं का असर अब युवाओं की डेटिंग आदतों पर भी दिखाई देने लगा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि आज के समय में कई युवा डेट पर जाने के बावजूद उस पर कोई एक्स्ट्रा खर्च नहीं कर रहे हैं।
सर्वे के मुताबिक- लगभग आधे लड़के (53%) और लड़कियां (54%) हर महीने डेट पर शून्य खर्च करते हैं।इसका मतलब है कि या तो वे डेट पर जाने के लिए ऐसे विकल्प चुन रहे हैं जो फ्री या कम लागत वाले हों, या फिर वे पूरी तरह से डेटिंग से दूरी बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड केवल पैसों की कमी का नतीजा नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक रुझानों और डिजिटल कनेक्टिविटी का भी असर है। आज कई युवा ऑनलाइन इंटरैक्शन, वर्चुअल डेट्स या घर पर साधारण मुलाकातों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनका मासिक खर्च काफी हद तक घट गया है।
कर्ज का बोझ
वित्तीय अनुशासन के मामले में अक्सर युवा पीढ़ी पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल ही में आई Vola Finance की रिपोर्ट ने एक अलग ही तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z के 63% लोग पहले ही अपना कर्ज चुका चुके हैं, जबकि पुरानी पीढ़ी (Older Generations) में यह आंकड़ा सिर्फ 37% है।
एवरेज पर्सनल लोन
Bank of America (BofA) रिपोर्ट के मुताबिक एवरेज पर्सनल लोन-
- Gen Z- 94,101 डॉलर
- मिलेनियल्स - 59,181 डॉलर
- Gen X - 53,255 डॉलर
Gen Z क्या सही कर रहे हैं?
वहीं, Bank of America (BofA) रिपोर्ट मुताबिक Gen Z ये सही कर रहे हैं-
51% ने पिछले साल बचत की।
24% ने कर्ज चुकाने पर ध्यान दिया।
सिर्फ 54% को परिवार से 500 डॉलर प्रति माह से कम मदद मिलती है (पिछले साल 44% था)
25% ने रिटायरमेंट खाते में योगदान दिया और आगे बढ़ाने की योजना है।
66% साथियों के बराबर खर्च करने का दबाव महसूस नहीं करते।
78% के लिए साथी चुनते समय आर्थिक जिम्मेदारी अहम है।
चुनौतियां अभी भी बाकी
Bank of America (BofA) की एक रिपोर्ट-
- 55% के पास 3 महीने के खर्च की आपातकालीन बचत नहीं
- 43% रिटायरमेंट बचत के रास्ते पर नहीं हैं
- 57% हफ्ते में कम से कम एक बार खुद पर खर्च करते हैं, लेकिन 59% मानते हैं कि इससे फालतू खर्च बढ़ जाता है।
ये बड़ी खर्च
- शिक्षा महंगी है. निजी कॉलेज में औसत सालाना भुगतान 24,000 डॉलर और सरकारी विश्वविद्यालय में लगभग 15,000 डॉलर है।
- घर खरीदना मुश्किल - कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर और बंधक दरें ऊंची है।
कम आय और बढ़ती महंगाई
इस समय Gen Z अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, जहां आमतौर पर सैलरी कम होती है। इसी दौरान बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरों के कारण रोजमर्रा की चीजें जैसे किराया, बिजली-पानी और ट्रांसपोर्ट भी महंगे होते जा रहे हैं। ऐसे में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा आवश्यक खर्चों में चला जाता है और बचत करने के लिए कुछ नहीं बचता।
अनियंत्रित खर्च की आदतें
बैंक ऑफ अमेरिका (BoFA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z अपनी आय का बड़ा हिस्सा यात्रा, मनोरंजन और ऑनलाइन शॉपिंग पर खर्च करता है। पिछले साल की तुलना में इन खर्चों में 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा, ये युवा अक्सर डिजिटल पेमेंट, डेबिट कार्ड और BNPL (Buy Now, Pay Later) जैसे विकल्पों का भरपूर उपयोग करते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में भी फंस रहे हैं।
नौकरी की अस्थिरता और बेरोजगारी
Gen Z को नौकरी पाने में भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई युवा ऐसे पदों पर काम कर रहे हैं जो उनकी शिक्षा और कौशल के अनुसार नहीं हैं। बेरोजगारी भत्ता लेने वाले Gen Z युवाओं की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो किसी भी आयु वर्ग में सबसे अधिक है। इससे साफ है कि उन्हें स्थायी और उपयुक्त रोजगार नहीं मिल पा रहा।
भविष्य की चिंता: घर, रिटायरमेंट और बचत
अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो Gen Z को भविष्य में घर खरीदना, रिटायरमेंट के लिए पैसे जोड़ना या आपात स्थिति में मदद के लिए फंड रखना बेहद मुश्किल होगा। 2030 तक इनकी वैश्विक खर्च करने की क्षमता 12.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, लेकिन बिना बचत और योजना के यह ताकत भी अस्थायी साबित हो सकती है।
Gen Z को क्या करना चाहिए?
- बजट बनाना सीखें- हर महीने की कमाई और खर्च का हिसाब रखें।
- बचत को प्राथमिकता दें- थोड़ी-थोड़ी रकम भी भविष्य के लिए जरूरी है।
- अनावश्यक खर्च कम करें- शौक और जरूरत के बीच फर्क समझना जरूरी है।
- उधारी से बचें- BNPL और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सीमित रखें।
- नए स्किल सीखें- ताकि करियर के बेहतर अवसर मिल सकें।
- वित्तीय जानकारी बढ़ाएं- पैसे से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें
Gen Z के सामने चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन, समझदारी और थोड़ी अनुशासन के साथ वे इन समस्याओं से पार पा सकते हैं। अगर वे अभी से अपनी खर्च करने की आदतों पर नियंत्रण रखें और बचत की शुरुआत करें, तो आने वाला समय उनके लिए सुरक्षित और सशक्त हो सकता है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर ये रुझान जारी रहे, तो युवा घर, परिवार और रिटायरमेंट जैसी जिंदगी की बड़ी योजनाएं टालते रहेंगे, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
Gen Z को अक्सर इंपल्सिव कहा जाता है, लेकिन हकीकत ये है कि वे महंगाई और कर्ज के बीच भी बचत और सही वित्तीय आदतें अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। बस चुनौती ये है कि अर्थव्यवस्था उनके लिए आसान नहीं है।
Gen Z की आर्थिक तंगी
अभिषेक (24 वर्षीय) एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. उन्होंने बताया कि हाल ही में कॉलेज से पढ़ाई पूरी करके नौकरी पर लगा हुं। अभिषेक ने बताया कि उनकी सैलरी ठीक-ठाक है, लेकिन वह पहले से ही Education Loan के बोझ तले दबे हुए है।
महंगाई बढ़ने से उनका किराया, खाने-पीने और ट्रांसपोर्ट का खर्च हर महीने बढ़ता जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया पर दिखने वाली लाइफस्टाइल को मैच करने के लिए वह ब्रांडेड कपड़े, गैजेट्स और घूमने-फिरने पर भी पैसे खर्च करते है। नतीजा, महीने के अंत तक उसकी सैलरी खत्म हो जाती है और क्रेडिट कार्ड का बिल भी बढ़ जाता है।
इस तरह कर्ज महंगाई और अत्यधिक खर्च की आदत मिलकर उसे एक फाइनेंशियल क्राइसिस की ओर धकेल देती हैं जहां बचत लगभग ना के बराबर है और भविष्य के लिए निवेश करने की क्षमता भी कम हो गई है।
सोनाली, 26 वर्ष की एक ग्राफिक डिजाइनर है जो फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स करती है। शुरू में उसे अच्छे ऑर्डर मिलते थे, लेकिन अब बाजार में प्रतियोगिता बढ़ने के कारण उसकी इनकम महीने-दर-महीने घटती-बढ़ती रहती है। अस्थिर इनकम के कारण वह किराया, इंटरनेट बिल और EMI समय पर नहीं चुका पाती। हेल्थ इंश्योरेंस और इमरजेंसी फंड जैसे जरूरी वित्तीय सुरक्षा उपाय उसने नहीं लिए, जिससे किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में वह सीधे कर्ज में चली जाएगी।
अरमान 22 साल की, कॉलेज स्टूडेंट है और पार्ट-टाइम जॉब करती है। उसने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर 'Buy Now, Pay Later' का यूज शुरू किया, ताकि वह महंगे कपड़े और गैजेट्स तुरंत ले सके। शुरुआत में यह आसान लगा, लेकिन कुछ ही महीनों में कई किस्त एक साथ देनी पड़ीं। समय पर पेमेंट न करने से पेनल्टी और ब्याज बढ़ते गए, और वह क्रेडिट स्कोर खराब होने की स्थिति में पहुंच गई।
समीर, 27 साल का, एक स्टार्टअप में काम करता था। अचानक कंपनी ने लागत घटाने के लिए उसे निकाल दिया। नौकरी जाते ही उसकी मासिक EMI और किराए का बोझ भारी हो गया। उसके पास सिर्फ 1 महीने की बचत थी, जो जल्दी खत्म हो गई, और उसे कर्ज लेना पड़ा। नई नौकरी पाने में 4 महीने लग गए, जिससे वह लोन और ब्याज के दबाव में और फंस गया।
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