नयी दिल्ली। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार कृषि को छोड़कर सभी प्रमुख क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। निर्माण क्षेत्र में 50.3 फीसदी की गिरावट देखी गई, जबकि विनिर्माण उद्योग में 39.3 फीसदी की गिरावट आई। दूसरी ओर ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सेवाओं में 47 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जीडीपी में भी 23.9 फीसदी की भारी भरकम गिरावट आई। इसके अलावा ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में भी 22.8 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इसे देखते हुए जानकार भारत में मंदी का अनुमान लगा रहे हैं।

आधिकारिक तौर पर कब आएगी मंदी
एक अनुमान के अनुसार भारत आधिकारिक रूप से मंदी में नहीं हो सकता है क्योंकि इसकी पहचान आम तौर पर लगातार दो तिमाहियों में गिरावट से की जाती है। लेकिन कमजोर निवेश, पूंजीगत व्यय और खपत की मांग अर्थव्यवस्था को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी। मई 2020 में रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा था कि आजादी के बाद से भारत की चौथी मंदी, जो कि उदारीकरण के बाद पहली होगी, और शायद सबसे खराब मंदी शुरू होने जा रही है। इससे पहले 1957-58, 1965-66 और 1979-80 में मंदी आई है। तीनों बार एक ही कारण रहा और वो था मानसून के कारण कृषि सेक्टर को प्रभावित होना। मगर अब आने वाली मंदी अलग है।
राज्यों को जीएसटी मुआवजे का रास्ता बंद
राज्यों की केंद्र सरकार पर जीएसटी मुआवजा बकाया है। हाल ही में इस मामले पर एक मीटिंग हुई थी। जिसमें केंद्र सरकार ने साफ किया कि उसके पास राज्यों को मुआवजे का पैसा देने के लिए फंड नहीं है। इसके बाद सामने आए जीडीपी आंकड़े राज्यों के लिए एक बुरा संकेत है। जीडीपी गिरावट से अब इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य केंद्र द्वारा जीएसटी मुआवजा राशि के ट्रांसफर के लिए इंतजार नहीं करेंगे।


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