Gautam Adani: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपनी नई सालाना रिपोर्ट में कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट का उद्देश्य कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और शेयर के प्राइस को जानबूझकर कम करके मुनाफा कमाना था।
बता दें कि जनवरी के महीने में हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप शेयर के हेर फेर और लेखांकन धोखाधड़ी में संलग्न हैं।

हिंडनबर्ग की तरफ से अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि उसने ग्रुप के शेयरों में शॉर्ट पोजिशन ले रखी है। जबकि, जब रिपोर्ट आई तो फिर अडानी ग्रुप के सभी शेयर आधे से भी कम हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज को हुआ।
शेयर के प्राइस में गिरावट के बाद कंपनी ने फॉलो आॅन पब्लिक ऑफर के जरिए से 20 हजार करोड़ रु जुटाने के अपने प्लान से पीछे हट गई थी। गौतम अडानी की तरफ से कहा गया है कि रिपोर्ट के वजह से कंपनी को कई सारे प्रतिकूल परिणामों का सामना करना पड़ा।
रिपोर्ट में कहा गया कि भले ही हमने तुरंत ही एक व्यापक खंडन जारी किया, विभिन्न वेस्टेड इंट्रेस्ट्स ने हिंडनबर्ग के तरफ से किए गए क्लेम का अवसरवादी रूप से लाभ उठाने का प्रयास किया। रिपोर्ट में कहा गया कि इन संस्थाओं ने कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी कहानियों को शामिल किया और प्रोत्साहित किया।
उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे पर कई सारी जनहित याचिकाएं दायर की गई। जांच के लिए अदालत ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। 6 सदस्यीय समिति की तरह से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उसको अडानी ग्रुप द्वारा वर्तमान मार्केट नियमों के उल्लंघन करने का कोई सबूत नहीं मिला है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को अडानी-हिंडनबर्ग मुद्दे को देखने का कार्य सौंपा गया था। सेबी की तरफ से इसके लिए अभी और वक्त मांगा गया है।


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