किस्मत का खेल : भारत की डायमंड सिटी में मजदूर को मिला हीरा, बना करोड़पति

नई दिल्ली, फरवरी 28। अकसर लोगों को कोई ऐसी कीमती चीज मिल जाती है, जिससे उनकी किस्मत एक दम बदल जाती है। बहुत से ऐसे लोगों हैं, जिन्हें व्हेल की उल्टी (ये करोड़ों में बिकती है), हीरे या कोई पुरानी एंटीक वस्तु हाथ लग जाती है, जिसे बेच कर वे मालामाल बन जाते हैं। भारत में भी एक शहर है, जहां लोगों की किस्मत बदलती है। ये है मध्य प्रदेश का मशहूर शहर पन्ना। पन्ना को डायमंड सिटी के नाम से जाना जाता है। पन्ना ने कई किसानों और मजदूरों की किस्मत बदली है। इन लोगों को यहां हीरा मिला और वे एक झटके में अमीर बन गए। एक और व्यक्ति को यहां हीरा मिला है।

26.11 कैरेट का है हीरा

26.11 कैरेट का है हीरा

पन्ना की जमीन एक और शख्स पर महरबान हो गयी है। बता दें कि सुशील शुक्ला को एक हीरा मिला है, जो 26.11 कैरेट का है। सुशील ईंट भट्ठा चलाते हैं। उन्हें पिछले हफ्ते ही ये हीरा मिला है। हीरे का वजन 26.11 कैरेट है। बता दें कि सुशील ने सरकार से जमीन पट्टे पर ली थी। पन्ना मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल से 380 किलोमीटर की दूरी पर है।

हो गया नीलाम

हो गया नीलाम

एक रिपोर्ट के अनुसार पन्ना शहर में कुल 88 हीरों की नीलामी हुई। इनमें सुशील शुक्ला का हीरा सबसे महंगा रहा। नीलामी के पहले दिन 36 हीरों की नीलामी कुल 1.65 करोड़ रुपये में हुई। दूसरे दिन 78.35 कैरेट के 52 हीरे 1.86 करोड़ रु में बिके। सुशील का हीरा 1.6 करोड़ रु से अधिक का रहा। बता दें कि सुशील पन्ना शहर के किशोर गंज इलाके में रहते हैं।

प्रति कैरेट के रेट

प्रति कैरेट के रेट

पन्ना के अधिकारियों के अनुसार नीलामी के दौरान इस कीमती पत्थर की बोली 3 लाख रुपये प्रति कैरेट से शुरू होकर 6.22 लाख रु प्रति कैरेट तक रहा। आपको बता दें कि पन्ना में 26.11 कैरेट साइज जितना बड़ा हीरा एक लंबे समय बाद मिला है। ये एक खुली नीलामी थी, जिसमें मुंबई, सूरत, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बड़े हीरा कारोबारी पहुंचे।

1.62 करोड़ रु मिले

1.62 करोड़ रु मिले

पन्ना की एक खदान से सुशील को जो 26.11 कैरेट का हीरे मिला, उसे 1.62 करोड़ रुपये में खरीदा गया। सुशील को यह हीरा जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थानीय कृष्णा कल्याणपुर इलाके में एक खदान में मिला। इस हीरे ने उन्हें करोड़पति बना कर उनकी किस्मत बदल दी है। सरकारी रॉयल्टी और टैक्स काटने के बाद जो राशि बचेगी वो सुशील को दी जाएगी। सरकार कुल राशि का 11.5 फीसदी बतौर रॉयल्टी लेगी।

20 साल पहले शुरू की थी खोज

20 साल पहले शुरू की थी खोज

सुशील शुक्ला 47 साल के हैं। उन्होंने करीब करीब 20 साल पहले हीरों की खोज शुरू की थी। हीरा मिलने पर वे काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि वे 20 साल से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अब जाकर उनकी किस्मत चमक गई है। हीरों की तलाश में हजारों लोग सरकार से जमीन पट्टे पर लेते हैं। यहां 10 x 10 फुट की जमीन 200 रुपये सालाना के खर्च पर मिल जाती है। फिर लोग हीरे की खुदाई शुरू कर देते हैं। जिसकी किस्मत में हो उसे हीरा मिलता है।

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