नई दिल्ली, सितंबर 9। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सिंगापुर के इमरजेंसी आर्बिट्रेटर (ईए) द्वारा फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) की रिलायंस रिटेल के साथ 24,731 करोड़ रुपये की विलय डील को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी। ये रोक चार सप्ताह के लिए लगाई गयी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को फ्यूचर ग्रुप के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक कॉन्सेंट ऑर्डर में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) और बाजार नियामक सेबी जैसी अथॉरिटीज को विलय सौदे से संबंधित कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करने का भी निर्देश दिया। ये निर्देश भी अगले चार सप्ताह तक के लिए है।

अमेजन के वकील ने क्या कहा
अदालत ने एफआरएल और फ्यूचर कूपन प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और मुकुल रोहतगी के बयानों पर विचार किया कि मध्यस्थ (ईए) ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में अंतिम फैसला सुरक्षित रखा है। विलय को चुनौती देने वाली अमेरिका की ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि उसकी एफआरएल, एफसीपीएल और उनके निदेशकों के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगाने के आदेश को पारित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
एफआरएल और एफसीपीएल ने किया था शीर्ष अदालत का रुख
एफआरएल और एफसीपीएल ने 17 अगस्त के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसमें कहा गया था कि वह ईए के फैसले को पूरा करने में एफआरएल की डील को आगे बढ़ने से रोकने वाले अपने एकल-न्यायाधीश के पहले के आदेश को लागू करेगा। हाईकोर्ट ने संपत्तियों को कुर्क करने का भी आदेश दिया था। उससे रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई 24,731 करोड़ रुपये की डील खतरे में पड़ गई है थी।


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