फ्री कॉलिंग और डेटा के दिन ज्यादा नहीं, जानें ट्राई की तैयारी

सस्ती कॉल और डाटा का दौर जल्द खत्म होने वाला है। दूरसंचार नियामक ट्राई जल्‍द ही मिनिमम टैरिफ तय कर सकता है। जी हां दूरसंचार नियामक ने ऐसे संकेत दिए हैं।

नई द‍िल्‍ली: सस्ती कॉल और डाटा का दौर जल्द खत्म होने वाला है। दूरसंचार नियामक ट्राई जल्‍द ही मिनिमम टैरिफ तय कर सकता है। जी हां दूरसंचार नियामक ने ऐसे संकेत दिए हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने संकेत दिया है कि वह कॉल और डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क दर तय करने की उद्योग की मांग पर विचार कर सकता है। इससे दूरसंचार उद्योग की वहनीयता सुनिश्चित हो सकेगी। दूरसंचार नियामक पूर्व में न्यूनतम शुल्क दर या शुल्क दर की सीमा तय करने के लिए हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है। मालूम हो कि ट्राई के रुख में यह बदलाव भारती एयरटेल के प्रमुख सुनील मित्तल द्वारा बुधवार को दूरसंचार सचिव से मुलाकात के बाद आया है। मित्तल ने दूरसंचार सचिव से डेटा के लिए न्यूनतम शुल्क या न्यूनतम दर तय करने की मांग की है।

Free Calling And Data Will Be Over TRAI Indicated

16 साल से कठिन परिस्थितियों में भी नियंत्रण में
बता दें कि ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने एवीआईए इंडिया वीडियो-360 के कार्यक्रम में कहा कि दूरसंचार शुल्क पिछले 16 साल से कठिन परिस्थितियों में भी नियंत्रण में रहे हैं। इतना ही नहीं और यह बेहतर तरीके से काम करते रहे हैं। अब नियामक उद्योग की न्यूनतम शुल्क तय करने की मांग पर गौर कर रहा है। मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो द्वारा नि:शुल्क वॉयस कॉल और सस्ते डेटा की पेशकश से उद्योग में काफी अफरातफरी रही। उसके बाद अन्य कंपनियों को भी शुल्क दरें कम करनी पड़ीं।

इस दौरान शर्मा ने बताया कि दूरसंचार कंपनियों ने हाल में हमें एक साथ लिखा है कि हम उनका नियमन करें। यह पहली बार है। वहीं पूर्व में 2012 में मुझे याद है कि उन्होंने शुल्कों के नियमन के टूाई के प्रयास का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि शुल्क दरें उनके लिए छोड़ दी जानी चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि नियामक तीन सिद्धान्तों उपभोक्ता संरक्षण, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और उद्योग की वृद्धि पर काम करता है। ट्राई ने पूर्व में दूरसंचार कंपनियों को दरें तय करने की अनुमति दी है और उनके द्वारा हस्तक्षेप के लिए कहे जाने पर ही दखल दिया है।

न्यूनतम शुल्क तय करना काफी महत्वपूर्ण
दूरसंचार कंपनियों ने 2017 में नियामक को न्यूनतम मूल्य तय करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस समय यह निष्कर्ष निकला था कि यह एक खराब विचार है। सुप्रीम के 24 अक्टूबर के फैसले में दूरसंचार कंपनियों के सांविधिक बकाए की गणना में गैर दूरसंचार राजस्व को भी शामिल करने के सरकार के कदम को उचित ठहराए जाने के बाद यह प्रस्ताव फिर आया है। बता दें कि इस फैसले के बाद भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और अन्य दूरसंचार कंपनियों को पिछले बकाया का 1.47 लाख करोड़ रुपये चुकाना है। वहीं मित्तल ने बुधवार को दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश से मुलाकात के बाद कहा था कि न्यूनतम शुल्क तय करना काफी महत्वपूर्ण होगा। उनका कहना है कि शुल्क दरों को बढ़ाने और उद्योग को व्यावहारिक बनाने की जरूरत है।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+