FPI Investment: भारतीय शेयर बाजारों के लिए अगस्त का महीना अब तक कमजोरी वाला रहा. बीते हफ्ते बाजार करीब डेढ़ फीसदी तक टूट गए. बाजारों में करेक्शन की वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली है. FIIs की तेज बिकवाली का ही असर रहा घरेलू बाजारों में भारी बिकवाली भी दर्ज की गई. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अब तक अगस्त में करीब 13400 करोड़ रुपए के शेयरों के बिकवाली की है.
डिपॉजिटरीज आंकड़ों के मुताबिक फॉरेन पॉर्टफोलियो इनवेस्टर्स यानी FPIs अगस्त में अब तक नेट सेलर रहे हैं. अगस्त में अब तक 13400 करोड़ रुपए के शेयरों की नेट बिकवाली की है. जबकि इस साल अब तक 22134 करोड़ रुपए का निवेश किया है. विदेशी निवेशकों ने अमेरिका में मंदी की आशंकाओं और येन कैरी ट्रेड को खत्म करने के बीच भारतीय बाजारों से निकासी की.
क्यों हो रही FPIs की निकासी?
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अगर बाजारों में तेजी जारी रहती है तो विदेशी निवेशक ज्यादा बिकवाली कर सकते हैं. क्योंकि भारतीय इक्विटी बाजार का वैल्युएशन तुलनात्मक रूप से हाई बना हुआ है. डिपॉजिटिरीज आंकड़ों के मुताबिक FPI ने 1 से 9 अगस्त तक इक्विटी मार्केट से 13431 करोड़ रुपए की शुद्ध विकवाली की है.

विजयकुमार ने कहा कि बैंक ऑफ जापान के ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ाने और अमेरिका में मंदी की आशंकाओं के बाद येन कैरी ट्रेड बंद होने से अगस्त में निकासी हुई है. इससे पहले जुलाई में आर्थिक ग्रोथ मजबूत बने रहने की उम्मीद, सुधारों का सिलसिला जारी रहने और लिस्टेड कंपनियों के अनुमान से बेहतर नतीजों के चलते बाजार में FPIs ने 32365 करोड़ रुपए के निवेश किए थे.
मई और जून में FPIs का फ्लो
जून में भी राजनीतिक स्थिरता कायम रहने और बाजार में तेज उछाल की वजह से 26565 करोड़ रुपए के नेट निवेश आया था. हालांकि, इससे पहले मई में विदेशी निवेशकों ने चुनावी नतीजों से 25586 करोड़ रुपए की निकासी हुई थी. जबकि अप्रैल में मॉरिशस के साथ भारत की कर संधि में बदलाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल की चिंताओं की वजह 8700 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली थी.


Click it and Unblock the Notifications