नयी दिल्ली। लॉकडाउन में ढील के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जून के पहले हफ्ते में भारतीय बाजारों में 18,589 करोड़ रुपये का जोरदार निवेश किया। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के मेगा राइट्स इश्यू, जो इसी के दौरान बंद हुआ और ओवरसब्सक्राइब किया गया, और कोटक महिंद्रा बैंक में उदय कोटक द्वारा बेची गई 2.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी से भी विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों की तरफ आकर्षित हुए। जून के पहले पांच कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने इक्विटी में 20,814 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, लेकिन डेब्ट सेगमेंट से 2,225 करोड़ रुपये निकाले। इस तरह एफपीआई की तरफ से पहले हफ्ते में कुल 18,589 करोड़ रुपये भारतीय बाजारों में आए।

लगातार तीन महीनों तक निकाली बड़ी रकम
एफपीआई की तरफ से जून में शुरुआत अच्छी रही है। मगर इससे पहले लगातार तीन महीनों, यानी मार्च, अप्रैल और मई, में एफपीआई ने भारतीय बाजार में जम कर बिकवाली की। मार्च में एफपीआई ने भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड 1.1 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। इसके बाद अप्रैल में उनकी तरफ से 15403 करोड़ रुपये और मई में 7366 करोड़ रुपये निकाले गए।
राहत पैकेज का पड़ा असर
एक्सपर्ट बताते हैं कि कोरोना संकट के आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा से बाजार सेंटीमेंट में सुधार हुआ है। इसके अलावा मई के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत की वृद्धि और वैश्विक मुद्रास्फीति में आई कमी से भी निवेशकों को हिम्मत बंधी है।
कैसा रहेगा एफपीआई का रुख
एक्सपर्ट बताते हैं कि भारत में एफपीआई द्वारा निवेश केवल भारतीय फैक्टर पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि इसमें वैश्विक आर्थिक आउटलुक भी शामिल है, जो निवेशकों को बहुत प्रभावित करता है। यूएस और चीन के बीच जारी तनाव, अमेरिका में आर्थिक स्थिति, और आगामी अमेरिकी चुनाव सभी ऐसे फैक्टर हैं जो वित्त वर्ष 2020-21 में भारत में एफपीआई निवेश को प्रभावित करेंगे।


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