नयी दिल्ली। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) जुलाई में भारतीय बाजारों में अभी तक शुद्ध विक्रेता बने रहे हैं। यानी जुलाई में अभी तक एफपीआई के भारतीय कैपिटल मार्केट में जितना निवेश किया गया है उससे ज्यादा निकाला गया है। इसके पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के कारण हैं, जिनमें कोरोनोवायरस के मामलों की बढ़ती संख्या और अमेरिका-चीन के बीच तनाव बढ़ना शामिल है। हालांकि एफपीआई अब भारतीय बाजार में धीरे-धीरे पैर जमा रहे हैं। असल में पिछले हफ्ते तक (17 जुलाई) एफपीआई ने भारतीय बाजार से 9015 करोड़ रु निकाले थे। मगर 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में आंकड़े एक दम से बदल गए।

जानिए कितना क्या निवेश
जहां 17 जुलाई तक एफपीआई ने 9015 करोड़ रु निकाले थे, वहीं 24 जुलाई तक ये आंकड़ा सिर्फ 86 करोड़ रु रह गया। यानी 17 से 24 जुलाई के दौरान एफपीआई ने काफी पैसा भारतीय कैपिटल मार्केट में लगाया। इससे पहले जून में एफपीआई ने जम कर निवेश किया था। पिछले महीने एफपीआई की तरफ से कुल 24,053 करोड़ रु का निवेश आया था।
जुलाई में चली ये चाल
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 1 से 24 जुलाई तक इक्विटी बाजार में 2,336 करोड़ रुपये का निवेश किया, लेकिन डेब्ट सेगमेंट से 2,422 करोड़ रुपये निकाले। यानी जुलाई में विदेशी निवेशकों ने इक्विट को ज्यादा तरजीह दी है। इक्विटी और डेब्ट सेगमेंट के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बाजारों से 1-24 जुलाई के बीच एफपीआई ने 86 करोड़ रुपये निकाले हैं।
कैसी रहेगी आगे की चाल
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एफपीआई बीमा और आईटी क्षेत्र में प्रमुख रूप से निवेश कर रहे हैं। वहीं फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। एक अन्य एक्सपर्ट के अनुसार एफपीआई को भारतीय डेब्ट मार्केट में पर्याप्त निवेश करने का स्तर अभी भी हासिल करना है। एफपीआई जिस तरह से इस समय डेब्ट मार्केट में पैसा लगा रहे हैं उससे जाहिर है कि उन्हें ये सेगमेंट इस समय पसंद नहीं आ रहा है।


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