दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या रोजाना हजारों के करीब रहती है।
नई दिल्ली: दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या रोजाना हजारों के करीब रहती है। लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी की भारत के सबसे बिजी कहे जाने वाले दिल्ली और मुंबई के एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में बीते साल के मुकाबले कमी देखी गई है। यहां इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर घरेलू यात्रियों की संख्या में कमी आई है, वहीं मुंबई के एयरपोर्ट का भी यही हाल है। छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही यात्रियों की संख्या में कमी देखी गई है।

इन कारणों से आई यात्रियों की संख्या में कमी
जी हां साल 2008 के बाद पहली बार भारत के सबसे व्यस्त दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डे पर यात्रियों की संख्या में कमी देखी गई है। इसके पीछे के बड़े कारण आर्थिक मंदी के साथ ही साथ जेट एयरवेज का 18 अप्रैल 2019 को परिचालन बंद करना भी है। यात्रियों की संख्या के कम होने के अन्य कारण इंडिगो और गोएयर के ए320 नियो विमानों में लगे प्रैट एंड व्हिटनी इंजनों में परेशानी और स्पाइजेट का बोइंग 737 मैक्स को बीते साल ग्राउंड करना भी हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अपना हवाईक्षेत्र 138 दिनों तक बंद रखा, जिसके चलते कुछ एयरलाइंस ने अपनी दिल्ली से मुंबई आने और जाने वाली फ्लाइट कैंसिल कर दी थीं। जिसके कारण यात्रियों की संख्या कम हो गई।
बीते साल से मुकाबले इस साल के आकड़ें
आईजीआई पर बीते साल यात्रियों की संख्या 7 करोड़ रही जो इस साल कम होकर 6.98 करोड़ रिकॉर्ड की गई। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) के डाटा के मुताबिक ये संख्या 2.6 फीसदी तक कम हुई है। दिल्ली हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 2019 में 1.9 करोड़ रही, जो बीते साल 2018 (1.8 करोड़) के मुकाबले 0.6 फीसदी बढ़ी है। वहीं घरेलू यात्रियों की संख्या 2019 में 4.9 करोड़ रही, जो बीते साल 2018 (5.2 करोड़) के मुकाबले 6 फीसदी कम है। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) के अनुसार, यात्रियों की संख्या 5.6 फीसदी कम होकर इस साल 4.7 करोड़ रही है। यहां 2019 में घरेलू यात्रियों की संख्या 3.38 करोड़ दर्ज की गई, जो बीते साल 2018 से (3.5 करोड़) 3.4 फीसदी कम है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में 7 फीसदी कमी दर्ज
इसके साथ ही यहां अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 2019 में 1.3 करोड़ दर्ज की गई है, जो बीते साल 2018 (1.4 करोड़) के मुकाबले 7 फीसदी कम है। इससे 11 साल पहले यानी साल 2008 में पूरे भारत में घरेलू यात्रियों की संख्या में कमी आई थी। उस समय वैश्विक मंदी शुरू हुई थी। लेकिन किराया सस्ता होने के कारण साल 2009 तक हालात काफी हद तक ठीक हो गए थे।
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