बजट के बाद से ही टैक्स को लेकर केंद्र सरकार घिरी हुई है. मिडिल क्लास से लेकर हर वर्ग घरेलू टैक्स सिस्टम से जैसे चिढ़ा हुआ है. इस पर अब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी बयान आया है. उन्होंने मंगलवार को मौजूदा टैक्स सिस्टम का बचाव करते हुए कहा कि इसमें कई चुनौतियां हैं. क्योंकि इससे ही रिसर्च और डेवलपमेंट समेत कई जरूरी काम पूरे होते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इन्हीं जरूरतों की वजह से सरकार को टैक्स रेट्स को कम करने से रोकते हैं.
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने शिक्षाविदों से अधिक पेटेंट के लिए आवेदन करने का आग्रह किया. साथ ही उन्होंने पेटेंट के कमर्शियल वैल्यू और समाज के लिए उनके संभावित फायदों पर जोर दिया.

टैक्स रेट्स घटाने में क्या हैं चुनौतियां?
निर्मला सीतामण ने कहा कि कई बार वित्त मंत्री होने के नाते मुझे लोगों को यह जवाब देना पड़ता है कि हमारा टैक्स सिस्टम इस तरह क्यों हैं? हम इससे भी कम क्यों नहीं कर सकते? उन्होंने कहा कि मैं चाहती हूं कि मैं इसे लगभग जीरो तक ला सकूं, लेकिन भारत की चुनौतियां गंभीर हैं और चुनौतियों से पार पाना होगा.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की संसाधन संबंधी जरूरतें इतनी महत्वपूर्ण हैं कि टैक्स का एक निश्चित स्तर बनाए रखना अपरिहार्य है. उन्होंने बताया कि भारत अपने स्वयं के धन का इस्तेमाल करके स्वतंत्र रूप से बायो फ्लूल से न्यू एनर्जी की ओर बढ़ रहा है.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर हम कहीं और से आने वाले पैसे का इंतज़ार नहीं कर सकते, तो हमें इनोवेशन के साथ आगे आना होग, जिससे देश मौजूद रिसोर्सेज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सके. वित्त मंत्री के भाषण से यह साफ हो गया है कि राष्ट्रीय आवश्यकताओं के बीच टैक्स कटौती क्यों चुनौतीपूर्ण है, और आर्थिक ग्रोथ को गति देने में इनोवेशन और पेटेंटिंग के महत्व को रेखांकित किया गया.


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